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एम्बुलेंस चालक व फार्मासिस्ट से मारपीट पर भाकियू भी आंदोलन में हुई शामिल तहसीलदार ने धरना प्रदर्शन कर रहे फार्मासिस्टों  से की बातचीत

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सिद्धौर, बाराबंकी – सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक सप्ताह पूर्व फार्मासिस्ट व 108 एंबुलेंस चालक के साथ मारपीट की गई थी। इसके खिलाफ असन्द्रा थाने में मुकदमा दर्ज था। उसी मामले में पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की जिसको लेकर बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच करने पहुंची तो भारतीय किसान यूनियन कार्यकर्ताओं ने भी मौके पर पहुंचकर धरना प्रदर्शन शुरू किया।
नगर पंचायत सिद्धौर के डोमन गडढा निवासी अखिलेश यादव की लगभग 20 वर्षीय पुत्री आयुषी को एक सप्ताह पूर्व गंभीर हालत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। आयुषी का इलाज मेडिकल कॉलेज  लखनऊ से चल रहा था। अचानक तबियत बिगड़ने पर परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे प्रशिक्षु फार्मासिस्ट ने इंजेक्शन लगाया। इसके थोड़ी देर बाद उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप था कि चिकित्सक व फार्मासिस्ट नहीं आए और प्रशिक्षु से इंजेक्शन लगवा दिया। एंबुलेंस 108 का चालक सर्वेश यादव उर्फ गुड्डू, आयुषी  के परिवार का है। इसी बात को लेकर विवाद हो गया।फार्मासिस्ट ने आरोप लगाया है कि सर्वेश यादव उमेश यादव और शिवम यादव के साथ मिलकर अभद्रता की और उसकी पिटाई कर दी।पीड़ित की शिकायत पर असन्द्रा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। इसी बात को लेकर अखिलेश यादव ने भाकियू अराजकता नैतिक के जिला उपाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार वर्मा से मिले और अपनी बात बताई। उक्त बात को लेकर जिला उपाध्यक्ष ने अखिलेश यादव के पक्ष में अस्पताल प्रांगण में धरना शुरू कर दिया। सूचना पर पहुंचे  अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डीके श्रीवास्तव जमाल अहमद डिप्टी सीएमओ डॉक्टर सुरेंद्र की टीम जांच के लिए पहुंची। सूचना पर हैदरगढ़ तहसीलदार रामजी द्विवेदी राजस्व लेखपाल आनंद प्रकाश भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने जांच टीम से पूछा की प्रशिक्षु फार्मासिस्ट कब सीएचसी पर आया था और कब उसकी ट्रेनिंग समाप्त हुई है। यदि समाप्त हो गई थी तो फिर उसे यहां इलाज करने के लिए किसके आदेश पर रखा गया। जिस पर नायब तहसीलदार रामजी द्विवेदी ने धरना स्थल पर पहुंचकर बताया कि प्रशिक्षु फार्मासिस्ट वीरेंद्र कुमार को 3 महीने कार्य करने की अनुमति विभाग द्वारा दी गई थी। फिर भी कार्यकर्ता नहीं माने और कहा जब तक विभाग का कोई सक्षम अधिकारी हम कार्यकर्ताओं को संतुष्ट नहीं करता तब तक धरना प्रदर्शन समाप्त नहीं किया जाएगा।
इसके बाद जांच टीम और नायब तहसीलदार प्रशिक्षित फार्मासिस्ट का बयान लेने के लिए उसके घर पहुंचे और उसका लिखित बयान लिया। धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं को एडिशनल सीएमओ व किसान यूनियन अराजनैतिक के पदाधिकारी के साथ बैठक की,उक्त अधिकारियों के दिए गए आश्वासन के बाद धरना समाप्त हो गया।

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