हैदरगढ़, बाराबंकी – भूमाफियाओं व भ्रष्टाचारी तंत्र जो कराए वो कम है। किसी की कहीं की जमीन कहीं दिखा दें या बट्टेखाते में डाल दें कोई हिसाब नहीं रह गया है रामराज्य में भी। सामने आए मामले में एक दलित की जमीन पर जिम्मेदारों ने ना सिर्फ एक पंडित महाराज को कब्जा करा दिया बल्कि दलित के शिकायत करने पर उसपर अधिकारों का दुरूपयोग कर खामोश कराने का नाजायज प्रयोग भी जानकारी अनुसार सामने आया है। मामला हैदरगढ़ तहसील के ईश्वरीगंज गांव का है जहाँ पर एक दलित परिवार लगभग पिछले 60-65 वर्ष से खेती करता आ रहा है लेकिन गांव के कुछ लोगों की बुरी नजर उसकी खेती पर पड़ी और हल्का लेखपाल से मिलीभगत करके न सिर्फ जबरन उसको खेती करने से रोका बल्कि उसी जमीन की पैमाइश किये बगैर दूसरे व्यक्ति का कब्जा करवा दिया! इस संबंध मे पीड़ित दलित युवक ने कई बार तहसील मे शिकायत की लेकिन हल्का लेखपाल ने पीड़ित परीदीन को डरा धमकाकर बैरंग लौटा दिया! थक हारकर परीदीन ने बुधवार को जनसुनवाई पोर्टल पर मामले की शिकायत की! शिकायत मे पता चला कि परीदीन पुत्र बाबूलाल ग्राम ईश्वरीगंज मजरे रामनगर परगना व तहसील हैदरगढ़ का निवासी है, रामनगर की गाटा संख्या 1552 पर प्रार्थी के पूर्वजों से लेकर आज तक परिवार खेती करता आ रहा है लेकिन 1 साल पहले उस समय के हल्का लेखपाल व पुलिस प्रशासन द्वारा उक्त भूमि से प्रार्थी को खेती करने से रोक दिया गया और कहा गया कि यह सरकारी भूमि है जबकि इस भूमि पर ग्राम निवासी अंशू, वैभव पुत्रगण विनोद व श्रवण कुमार पुत्र गोपाल को जबरन कब्जा दे दिया गया तब से लेकर अब तक प्रार्थी ने कई बार उपजिलाधिकारी हैदरगढ़ को शिकायत की लेकिन जब शिकायत हल्का लेखपाल तक पहुंचती तो हल्का लेखपाल ने उल्टा प्रार्थी को धमकाया और मामले को शांत कर दिया! इसी प्रकरण में जब पीड़ित परीदीन ने बुधवार को जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की , जैसे ही इसकी भनक हल्का लेखपाल कृष्णमुरारी को लगी तुरंत हल्का लेखपाल ने पीड़ित परीदीन को फोन मिलाकर धमकाया और उल्टा पीड़ित पर ही मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देते हुये कहा कि तुम अब जेल चले जाओगे और जेल की हवा खाओगे बहुत ज्यादा नेता गिरी करने लगे हो! प्रार्थी लेखपाल के इस रवैय्ये से काफी भयभीत है और प्रार्थी का कहना है कि उसकी हत्या भी हो सकती है, परीदीन ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है, मामले को लेकर जब हल्का लेखपाल से हमारे संवाददाता ने बात की तो हल्का लेखपाल ने कहा कि उनको अभी चार्ज लिये हुये दस दिन हुये हैं इसलिए जानकारी नहीं है! वहीं पीड़ित ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है! अब देखना है कि मामला प्रकाश मे आने के बाद कोई खास कार्यवाही होती है या नहीं यह भविष्य के गर्भ में है?
जिस जमीन को सरकारी बताकर खेती करने से रोका, उसी पर लेखपाल ने दूसरे का कब्जा करवाया
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