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प्रशासन का हिटलरी आदेश मीडिया कवरेज में बना बाधक, शिक्षा माफियाओं की बल्ले-बल्ले

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बाराबंकी – भारी भ्रष्टाचार में माफिया कभी-कभी इमानदार तेजतर्रार अधिकारियों को कैसे गुमराह कर व मझौले अधिकारियों से सांठगांठ कर कैसे अपना काम निकालते हैं, इसका बेहतरीन उदाहरण हाई स्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षाओं में मीडिया कवरेज पर रोक लगाए जाने के हिटलरी असंवैधानिक आदेश में साफ झलक रहा है। हां यह बात गौर करने वाली है कि जनपद विगत कई दशकों से शिक्षा माफियाओं का गढ़ रहा है जो हाई स्कूल व इंटर के सूबे में जनपद से टॉपरों की आगे की शिक्षा में फिसड्डी रहने वाले कई मामलों में कई बार उभर कर आया है। लेकिन मंहगी होती शिक्षा के पीछे का राज यही है कि जिम्मेदारों में मेटी रकम खर्च कर जो खेल जनपद से पूरे सूबे में चल रहा है उसमें तमाम वास्तविक होनहारों का हक मारा जा रहा तो दूसरी तरफ गधे मलाई काट रहे हैं और इसके पीछे सूबे का बेलगाम-भ्रष्टाचारी व हिटलरी होती लालफीताशाही ही अहम है। इसको प्रमाणित करती घटना पिछले वर्ष ही विधि की परीक्षा में सिटी लॉ कॉलेज में सामने आयी सामूहिक नकल का वायरल वीडियो ही था। जो मीडिया के चलते ही वायरल हुआ तो प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन की मिलीभगत में वीडियो बनाकर वायरल करने वाला पीड़ित छात्र जो सतरिख स्थित एक लॉ कॉलेज का बताया गया को बलि का बकरा बना दबाव बनाने का प्रयास सिफर रहा। बताते चले सोमवार को जब दैनिक हिन्दी समाचार पत्र का पत्रकार हमेशा की भांति जनता इंटर कॉलेज कवरेज करने पहुंचा तो वहां के प्रधानाचार्य ने अभद्रता करते हुए पुलिस में कंपलेन करने की धमकी देते हुए इसे डीएम का आदेश बताया। जबकि नियमानुसार मीडिया को कवरेज से नहीं रोका जा सकता। हां वो कक्षा में नहीं जा सकता केवल बाहर से फोटो वीडियो आदि बना सकता है। लेकिन नया आदेश देखा जाए तो लोकतांत्रिक अधिकारों पर ग्रहण लगा अहम ब्रह्मास्मि वाला ही प्रतीत हो रहा है। मीडिया को कवरेज से रोक भ्रष्टाचार व तानाशाही किसकदर सर चढ़कर बोल रही है यह भी उस समय सामने आया जब सिरौलीगौसपुर शिक्षा खंड के कोटनाधाम स्थित विद्यालय में एक परीक्षा दे रही छात्रा (परिवारीजन नाम उजागर करने से बदनामी की आशंका से गुप्त रखना चाहते हैं) को वहां तैनात अध्यापिका ने जोरदार थप्पड़ मारा। जिससे छात्रा परीक्षा के पहले ही मानसिक अवसाद में चली गई। परिवारीजनों ने बताया कि बालिका मानसिक बीमारी से ग्रस्त थी जो लंबे इलाज बाद सही हुई थी। अब अवसाद कहीं बर्बादी का कारण ना बन जाए को लेकर गरीब दलित हरिजन परिवार परेशान हैं। यह भी डर है कि शिकायत किया तो कहीं फर्जी आरोपों में ना फंसा दे। बताते चलें कि लेकतांत्रिक व्यवस्थाओं में चतुर्थ स्तंभ की सबसे ज्यादा अहमियत व भूमिका होती है। जो तानाशाह, अलोकतांत्रिक व भ्रष्ट्राचारी जिम्मेदारों को फूटी आंख नही सुहाती ऐसा ही कुछ यहां भी शिक्षा विभाग-शिक्षा माफियाओं व जिला प्रशासन की मिलीभगत में मीडिया की कवरेज रोकने में स्पष्ट नजर आ रहा है। मामले में जहां जनता इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य ने इसे डीएम का आदेश बताया तो वही एसडीएस सदर ने भी बैठक में निर्देश की बात बतायी। डीएम शशांक त्रिपाठी के सीयूजी नंबर पर संबंधित मीडिया कर्मी के जहां विद्यालय से ही संपर्क का तीन बार प्रयास किया जो उठा ही नहीं। वहीं पत्रकार प्रेस महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मध्य ने जब संपर्क का प्रयास किया तो किसी अधीनस्थ ने नंबर उठाया और मैसेज पहुंचा बात करवाने को कहा, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। मामले को लेकर ट्वीट भी किया गया है।

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