Homeउत्तर प्रदेशहवन एवं भंडारे के उपरांत श्रीमद् भागवत का हुआ समापन

हवन एवं भंडारे के उपरांत श्रीमद् भागवत का हुआ समापन

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बाराबंकी- उत्तर टोला बंकी में 17 नवंबर से चल रही श्रीमद् भागवत का समापन 23 नवंबर शनिवार की रात्रि रुक्मणी के संग श्री कृष्ण के विवाह के साथ संपन्न हो गई। रविवार की सुबह कथा व्यास द्वारा हवन कराया गया तथा श्रीमद् भागवत में आए समस्त देवी देवताओं की विदाई की गई, साथ ही दोपहर भंडारे का आयोजन किया गया जो प्रभु की इच्छा तक चलता रहा।

महाराज सुश्री अंकिता मृदुल द्वारा शुक्रवार की कथा को आगे बढ़ते हुए शनिवार की रात रुक्मणी एवं श्री कृष्ण के विवाह की कथा को विस्तार पूर्वक बताते हुए कहा कि  रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को अपना पति मान लिया था और उन्हें मन ही मन अपना पति स्वीकार कर चुकी थीं.

रुक्मिणी ने अपनी एक सखी के ज़रिए श्रीकृष्ण को संदेश भिजवाया कि वह उनसे प्रेम करती हैं और उनसे ही विवाह करना चाहती हैं। कहा जाता है कि कृष्ण ने राधा से इसलिए विवाह नहीं किया क्योंकि दोनों के बीच आध्यात्मिक प्रेम था। कृष्ण ये भी संदेश देना चाहते थे कि प्रेम और विवाह दो अलग-अलग हैं, प्रेम का अर्थ विवाह नहीं होता।

भगवान कृष्ण का विवाह बहुत ही सुंदर विधि विधान एवं संस्कारों द्वारा कराया गया। जिसमें जयमाल, कन्यादान, सात फेरे नन्हे मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत झांकियां के माध्यम से दृश्य प्रस्तुत किए गए।

इस मौके पर बाराबंकी- उत्तर टोला बंकी में 17 नवंबर से चल रही श्रीमद् भागवत का समापन 23 नवंबर शनिवार की रात्रि रुक्मणी के संग श्री कृष्ण के विवाह के साथ संपन्न हो गई। रविवार की सुबह कथा व्यास द्वारा हवन कराया गया तथा श्रीमद् भागवत में आए समस्त देवी देवताओं की विदाई की गई, साथ ही दोपहर भंडारे का आयोजन किया गया जो प्रभु की इच्छा तक चलता रहा।
महाराज सुश्री अंकिता मृदुल द्वारा शुक्रवार की कथा को आगे बढ़ते हुए शनिवार की रात रुक्मणी एवं श्री कृष्ण के विवाह की कथा को विस्तार पूर्वक बताते हुए कहा कि  रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को अपना पति मान लिया था और उन्हें मन ही मन अपना पति स्वीकार कर चुकी थीं.
रुक्मिणी ने अपनी एक सखी के ज़रिए श्रीकृष्ण को संदेश भिजवाया कि वह उनसे प्रेम करती हैं और उनसे ही विवाह करना चाहती हैं। कहा जाता है कि कृष्ण ने राधा से इसलिए विवाह नहीं किया क्योंकि दोनों के बीच आध्यात्मिक प्रेम था। कृष्ण ये भी संदेश देना चाहते थे कि प्रेम और विवाह दो अलग-अलग हैं, प्रेम का अर्थ विवाह नहीं होता।
भगवान कृष्ण का विवाह बहुत ही सुंदर विधि विधान एवं संस्कारों द्वारा कराया गया। जिसमें जयमाल, कन्यादान, सात फेरे नन्हे मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत झांकियां के माध्यम से दृश्य प्रस्तुत किए गए।
इस मौके पर शिशु जायसवाल, दिलीप कुमार श्रीवास्तव, संजय जयसवाल, राजेश जायसवाल, दुर्गेश जायसवाल, विपुल जायसवाल, विवेक जायसवाल, राहुल, सोनू ,राजू, तरुण, वरुण  रूपनारायण, गुड़िया,विभा, साक्षी, कनिष्का, रेनू ,पप्पी,बेबी दुर्गेश,रेनू जायसवाल, रेखा जायसवाल, सैनी,संगीता जायसवाल, बाबू मौर्य, शिवा मौर्य, हिमालय, सूरज,प्रदीप, नितिन  श्रीवास्तव, तमाम महिलाए एवं पुरुष मौजूद रहे।

दिलीप कुमार श्रीवास्तव, संजय जयसवाल, राजेश जायसवाल, दुर्गेश जायसवाल, विपुल जायसवाल, विवेक जायसवाल, राहुल, सोनू ,राजू, तरुण, वरुण  रूपनारायण, गुड़िया,विभा, साक्षी, कनिष्का, रेनू बाराबंकी- उत्तर टोला बंकी में 17 नवंबर से चल रही श्रीमद् भागवत का समापन 23 नवंबर शनिवार की रात्रि रुक्मणी के संग श्री कृष्ण के विवाह के साथ संपन्न हो गई। रविवार की सुबह कथा व्यास द्वारा हवन कराया गया तथा श्रीमद् भागवत में आए समस्त देवी देवताओं की विदाई की गई, साथ ही दोपहर भंडारे का आयोजन किया गया जो प्रभु की इच्छा तक चलता रहा।
महाराज सुश्री अंकिता मृदुल द्वारा शुक्रवार की कथा को आगे बढ़ते हुए शनिवार की रात रुक्मणी एवं श्री कृष्ण के विवाह की कथा को विस्तार पूर्वक बताते हुए कहा कि  रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को अपना पति मान लिया था और उन्हें मन ही मन अपना पति स्वीकार कर चुकी थीं.
रुक्मिणी ने अपनी एक सखी के ज़रिए श्रीकृष्ण को संदेश भिजवाया कि वह उनसे प्रेम करती हैं और उनसे ही विवाह करना चाहती हैं। कहा जाता है कि कृष्ण ने राधा से इसलिए विवाह नहीं किया क्योंकि दोनों के बीच आध्यात्मिक प्रेम था। कृष्ण ये भी संदेश देना चाहते थे कि प्रेम और विवाह दो अलग-अलग हैं, प्रेम का अर्थ विवाह नहीं होता।
भगवान कृष्ण का विवाह बहुत ही सुंदर विधि विधान एवं संस्कारों द्वारा कराया गया। जिसमें जयमाल, कन्यादान, सात फेरे नन्हे मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत झांकियां के माध्यम से दृश्य प्रस्तुत किए गए।
इस मौके पर शिशु जायसवाल, दिलीप कुमार श्रीवास्तव, संजय जयसवाल, राजेश जायसवाल, दुर्गेश जायसवाल, विपुल जायसवाल, विवेक जायसवाल, राहुल, सोनू ,राजू, तरुण, वरुण  रूपनारायण, गुड़िया,विभा, साक्षी, कनिष्का, रेनू ,पप्पी,बेबी दुर्गेश,रेनू जायसवाल, रेखा जायसवाल, सैनी,संगीता जायसवाल, बाबू मौर्य, शिवा मौर्य, हिमालय, सूरज,प्रदीप, नितिन  श्रीवास्तव, तमाम महिलाए एवं पुरुष मौजूद रहे।

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