बाजारशुकुल, अमेठी – बगैर भक्ति भाव के ईश्वर की कृपा पाना मुश्किल है। सांसारिक सुख-साधन बहुत हों, अगर भक्ति भाव न हो तो मनुष्य का जीवन निरर्थक है। जिस प्रकार स्त्री बिना आभूषण के सुंदर नहीं दिखती, उसी तरह बिना भक्ति के मानव जीवन बेकार है। ये बातें क्षेत्र के शुकलन पुरवा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन प्रवाचक आचार्य आशुतोष तिवारी महाराज ने कहीं। प्रवाचक ने कृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि ईश्वर भक्तों की रक्षा करने के लिए घर तक आते हैं। मनुष्य का जीवन समस्याओं का घर है। सच्ची श्रद्धा और भाव से भगवान की भक्ति सभी मोह-माया और चिंताओं के नाश का कारक बनती है। बताया कि भागवत महापुराण से हमें यह शिक्षा मिलती है कि शिष्य जब तक गुरु के प्रति समर्पित नहीं हो जाता, गुरु वचनों पर श्रद्धा-विश्वास न हो, तब तक गुरु का ज्ञान हमारे हृदय में नहीं उतर सकता। इस दौरान अरविंद शुक्ल, आशीष शुक्ल, संदीप शुक्ल, विजय शुक्ल, अभी शुक्ल, राकेश शुक्ल, अभिषेक शुक्ल आदि मौजूद रहे।
बिना भक्ति भाव ईश्वर की कृपा पाना मुश्किल
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