श्वेतगंगा और श्वेतमाधव
धर्मात्मा राजा श्वेत और भगवान विष्णु याने माधव से जुड़े एक पवित्र तीर्थस्थल और प्रतिमा को श्वेतमाधव कहा जाता हैं, जहाँ राजा श्वेत की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वैकुण्ठ धाम का वरदान दिया था और वहां स्थापित प्रतिमा को श्वेतमाधव’ कहा गया था, जिसके दर्शन से मोक्ष मिलता है।
पुरी ओडिशा में श्वेत गंगा नाम का एक पवित्र कुंड है जिसके पास श्वेत माधव याने भगवान विष्णु और गंधेश्वर मतलब भगवान शिव के मंदिर हैं, और यह पंच तीर्थों में से एक तीर्थ हैं।
राजा श्वेत की भक्ति से प्रसन्न होकर श्रीविष्णु ने उन्हें कहा था, देवता, मुनि, सिद्ध और योगी जिस पद को प्राप्त नहीं कर पाते उस पद को तुम प्राप्त करोगे। संपूर्ण लोकों को लांघकर विष्णुलोक में आवोगे। तूम्हारी कीर्ति तीनों लोकों में फैलेगी।
श्वेतगंगा तीर्थ का जल एक कुश के अग्रभाग से भी कोई खुदपर छिड़केगा वह स्वर्गलोक को प्राप्त कर लेगा। मतलब भगवान कहते हैं कि इस तीर्थ का एक बूंद जल छिड़कने से भी स्वर्गलोक की प्राप्ति होगी।
जो यहाँ स्थापित श्वेतमाधव नाम की प्रतिमा का दर्शन करता हैं और उस प्रतिमा को प्रणाम करता हैं, वह देह त्यागकर भगवान का स्मरण करते हुए शांत पद को प्राप्त होता हैं।
इस भाग में इतना ही।
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