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श्रीराम तीर्थ

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गौतमी गंगा के तट पर भगवान श्रीराम ने छत्तीस कलाओं वाले महादेवजी की स्थापना की। उनकी षोडशोपचार एवं आवरण सहित पूजा की। भगवान शंकर का स्तोत्रगान किया।

भगवान श्रीराम की पूजापाठ से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने उन्हें मनचाहा वर दिया।

श्रीराम द्वारा किये गये स्तोत्रगान से जो कोई भक्तिपूर्वक भगवान शंकर की पूजा करता हैं, उसके सम्पूर्ण कार्य सिद्ध हो जाते हैं।

जिनके पितर नरक के समुद्र में डूबे हैं, उनका यहाँ पिंड दान करने से पितर स्वर्गलोक जाते हैं।

जन्मभर के मानसिक, वाचिक, शारिरिक पाप यहाँ स्नान करनेमात्र से तत्काल नष्ट हो जाते हैं।

जो लोग याचकों को भक्तिपूर्वक थोड़ा भी दान देते हैं, उनको उत्तम फल की प्राप्ति होती हैं।

श्रीराम तीर्थ के पास ही लक्ष्मणतीर्थ और सीता तीर्थ हैं। वहाँ भी पाप नष्ट होकर पुण्य प्राप्ति मिलती हैं।

इस भाग में इतना ही।

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