पीएम के पेन से कुंडली ज्योतिष में आप सबका स्वागत हैं। इस भाग में हम भाव ग्यारह में मंगल फल की जानकारी लेनेवाले हैं।
ग्यारहवें भाव में मंगल शुभ स्थिति में हो तो जातक-जातिका साहसी, हिम्मती, धनी, सम्पत्तिवान, राजनीतिज्ञ, प्रभावशाली हो सकते हैं। ऐसे लोग डॉक्टर, वकील, इंजीनियर हो सकते हैं।
ग्यारहवें भाव में मंगल अशुभ स्थिति में हो तो जातक-जातिका झूठे अभिमानी, अहंकारी, कठोर, शीघ्र क्रोधि हो सकते हैं। इनके उच्चशिक्षा में बाधा आ सकती हैं। इनके ननिहाल के सुख में कुछ कमी आ सकती हैं। पैतृक संपत्ति मिलने में मुश्किलें आ सकती हैं। जीवन में खर्चे ज्यादा हो सकते हैं। बार-बार नौकरी-व्यवसाय बदलने पड़ सकते हैं। ऐसे लोग अनैतिक मार्ग से धन कमा सकते हैं। इन्हें रक्तविकार, उदरविकार, चोट चपेट का खतरा रह सकता हैं।
ग्यारहवें भाव में सिंह राशि का मंगल हो तो जातक-जातिका उच्च पदस्थ अधिकारी हो सकते हैं।
आपकी कुंडली देखिए। जहाँ मंगल लिखा हैं, वहाँ अगर 5 नंबर लिखा होगा तो यह प्रिडिक्शन आपसे मैच कर सकती हैं।
ग्यारहवें भाव में मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु और कुंभ राशि में मंगल हो तो जातक-जातिका के संतान सुख में बाधाएं आ सकती हैं।
आपकी कुंडली देखिए। जहाँ मंगल लिखा हैं, वहाँ अगर 1, 3, 5, 7, 9, 11 नंबर लिखा होगा तो यह प्रिडिक्शन आपसे मैच कर सकती हैं।
ग्यारहवें भाव में वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर और मीन राशि में मंगल हो तो जातक-जातिका को अपनी संतान द्वारा प्रसिद्धि मिल सकती हैं। जातक-जातिका खुद अच्छे चिकित्सक हो सकते हैं।
आपकी कुंडली देखिए। जहाँ मंगल लिखा हैं, वहाँ अगर 2, 4, 6, 8, 10, 12 नंबर लिखा होगा तो यह प्रिडिक्शन आपसे मैच कर सकती हैं।
ग्यारहवें भाव में कर्क, वृश्चिक, मीन राशि में मंगल हो तो जातक-जातिका को अपने मित्रों के कारण परेशानीयाँ हो सकती हैं।
आपकी कुंडली देखिए। जहाँ मंगल लिखा हैं, वहाँ अगर 4, 8, 12 नंबर लिखा होगा तो यह प्रिडिक्शन आपसे मैच कर सकती हैं।
ग्यारहवें भाव में मेष, सिंह और धनु राशि में मंगल हो तो जातक-जातिका रेस, जुआ, सट्टा, शेअर, ट्रेड आदि के शौकीन हो सकते हैं।
आपकी कुंडली देखिए। जहाँ मंगल लिखा हैं, वहाँ अगर 1, 5, 9 नंबर लिखा होगा तो यह प्रिडिक्शन आपसे मैच कर सकती हैं।
कृपया ध्यान दे, किसी भी ग्रह की केवल एक स्थिती देखकर उसकी पुर्ण भविष्यवाणी नहीं कि जाती। कोई भी ग्रह जिस भाव में बैठा हैं, वहाँ वह किस राशि में हैं? किस नक्षत्र में हैं? वह कितने अंशों में हैं? किस अवस्था में हैं? उसपर कौनसे ग्रह दृष्टि डाल रहे हैं? भविष्यवाणी की जानेवाला ग्रह, खुद किस भाव पर और ग्रहों पर दृष्टि डाल रहा हैं? उसकी युति किस ग्रह के साथ हैं? ग्रहों की दशा, गोचर, वर्षफल, वर्गकुंडली आदि अन्य बातों का भी ध्यान रखना पड़ता हैं।
उपाय के लिए ग्रह उपाय की अलग सिरीज बनेगी, उसमें उपाय देखें या हमें इमेल या मैसेज करें।
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इस भाग में इतना ही।
धन्यवाद!




