गौतमी गंगा की स्नान विधी
ब्रम्हपुराण में ब्रम्हाजीने नारदजी से गोदावरी नदी की जो स्नानविधि बतायी हैं वह इस प्रकार हैं:
यह विधि शंकर भगवान ने गौतम ऋषि को बतायी थी।
पहले नान्दीमुख श्राद्ध करके शरीर की शुद्धि करे, फिर ब्राह्मणों को भोजन कराये और उनसे स्नान करने की आज्ञा ले। तदनन्तर ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए गोदावरी नदी में स्नान करने के लिये जाय।
उस समय पापी मनुष्यों के साथ वार्तालाप न करे। जिसके हाथ, पैर और मन भलीभाँति संयम में रहते हैं, वही तीर्थ का पूरा फल पाता है। दुर्भावना का परित्याग करके अपने धर्म में स्थिर रहे और थके-माँदे, पीड़ित मनुष्यों की सेवा करते हुए उन्हें यथायोग्य अन्न दे।
जिनके पास कुछ नहीं है, ऐसे साधुओं को वस्त्र और कम्बल दे। भगवान विष्णु की तथा गंगाजी के प्रकट होने की दिव्य कथा सुने।
इस विधि से यात्रा करनेवाला मनुष्य तीर्थ के उत्तम फल का भागी होता है।
गोदावरी नदी में दो-दो हाथ भूमिपर तीर्थ हैं। उनमें भगवान शंकर स्वयं सर्वत्र रहकर सब की समस्त कामनाओं को पूर्ण करते रहते हैं।
सरिताओं में श्रेष्ठ नर्मदा अमरकंटक पर्वत पर अधिक उत्तम मानी गयी हैं। यमुना का विशेष महत्त्व उस स्थान पर है, जहाँ वह गंगा से मिली हैं। सरस्वती नदी प्रभास तीर्थ में श्रेष्ठ बतायी गयी हैं। तृष्णा, भीमरथी और तुंगभद्रा इन तीन नदियों का जहाँ समागम हुआ है, वह तीर्थ मनुष्यों को मुक्ति देनेवाला है। इसी प्रकार पयोष्णी नदी भी जहाँ ताप्ती में मिली हैं, वह तीर्थ मोक्षदायक है; परंतु गौतमी गङ्गा शंकर भगवान की आज्ञा से सर्वत्र, सर्वदा और सब मनुष्यों को स्नान करने पर मोक्ष प्रदान करेंगी।
कोई-कोई तीर्थ किसी विशेष समय में देवता का शुभागमन होने पर अधिक पुण्यमय माना जाता है, किंतु गोदावरी नदी सदा ही सबके लिये तीर्थ है।
दो सौ योजन के भीतर गोदावरी नदी में साढ़े तीन करोड़ तीर्थ होंगे। ये गंगा निम्नलिखित नामों से प्रसिद्ध होंगी:
माहेश्वरी, गंगा, गौतमी, वैष्णवी, गोदावरी, नन्दा, सुनन्दा, कामदायिनी, ब्रह्मतेजः समानीता तथा सर्वपापप्रणाशिनी।
गोदावरी भगवान शंकर को सदा ही प्रिय हैं। ये स्मरणमात्र से पाप राशि का विनाश करनेवाली हैं। पाँचों भूतों में जल श्रेष्ठ है। जल में भी जो तीर्थ का जल है, वह सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
तीर्थ जल में भी भागीरथी गंगा श्रेष्ठ हैं और उनसे भी गौतमी गंगा उत्कृष्ट मानी गयी हैं; क्यों कि यह भगवान शंकर की जटा से लायी गयी थीं। अत: इनसे बढ़कर कल्याणकारी तीर्थ दूसरा कोई नहीं है।
स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल में भी गङ्गा सब मनोरथों को पूर्ण करनेवाली हैं।
इस तरह गौतमी गंगा की जानकारी ब्रह्मपुराण से हमें मिलती हैं।
इस भाग में इतना ही।
हमारें वीडियो और पोस्ट में दी जानेवाली जानकारी को देखने और ड्राफ्ट को कॉपी पेस्ट करने के लिए आप हमारे यूट्यूब चैनल, ब्लॉग, फेसबुक, न्यूज वेबसाइट को विजिट कर सकते हैं।
उनमें लिखें टेक्स्ट को कॉपी पेस्ट करके अपने लिए नोट्स बना सकते हैं, फिर भी कोई समस्या आ रही हैं तो वीडियो और पोस्ट में दी गयी मेल आईडी पर मेल करें या सोशल मीडिया पर मैसेज करें। हम यथासंभव सभी को हर प्रकार की जानकारी देने की कोशिश करेंगे।
ज्योतिष संबंधी मेल आईडी- pmsastrology01@gmail.com
धर्मग्रंथ संबंधी मेल आईडी- dharmgranthpremi@gmail.com
हमारें कंटेंट ढूँढने के लिए कीवर्ड्स
pm ke pen se
pm ke pen se brahma puran
pm ke pen se tarot card
pm ke pen se kundali jyotish
dharmgrantho se upay, upachar aur uargdarshan
धन्यवाद!




