नोएडा: सेक्टर-75 स्थित ‘गोल्फ सिटी प्लॉट नंबर 8’ अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) में वित्तीय अनियमितताओं और फंड के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। निवासियों की शिकायत पर कड़ा संज्ञान लेते हुए डिप्टी रजिस्ट्रार (फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स, गाजियाबाद) ने सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 की धारा-24 के तहत जांच और फॉरेंसिक ऑडिट का आदेश जारी कर दिया है।
मुख्य आरोप: बिल्डर से मिलीभगत और 55 लाख का चूना
शिकायतकर्ता – राजपाल सिंह और 35 अन्य निवासियों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार, मुख्य विवाद एडवांस CAM (Common Area Maintenance) की रिकवरी को लेकर है। मामले के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
रिकवरी में भारी अंतर: स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, बिल्डर से लगभग ₹1.90 करोड़ की वसूली होनी चाहिए थी, लेकिन AOA-1 ने कथित तौर पर बिना किसी ठोस आधार के केवल ₹1.35 करोड़ की वसूली पर सहमति जता दी। इससे सोसाइटी को सीधे तौर पर ₹55 लाख का नुकसान होने का अनुमान है।

संदेहास्पद एग्रीमेंट: बिल्डर के साथ किया गया एग्रीमेंट (दिनांक 01-03-2023) विवादों के घेरे में है, क्योंकि इसके लिए स्टांप पेपर काफी बाद में (17-05-2023) खरीदा गया था। साथ ही, एग्रीमेंट के सभी पन्नों पर बिल्डर के प्रतिनिधि के हस्ताक्षर भी नहीं हैं।
फॉरेंसिक ऑडिट की सिफारिश: चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म ‘अग्रवाल ध्रुव एंड कंपनी’ ने पहले ही वर्ष 2023-24 के खातों में विसंगतियां पाते हुए फॉरेंसिक ऑडिट की सिफारिश की थी, जिसे तत्कालीन AOA द्वारा नजरअंदाज किया गया।
डिप्टी रजिस्ट्रार की सख्त कार्रवाई
डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय ने दोनों पक्षों (शिकायतकर्ता और AOA) की दलीलें सुनने के बाद माना कि वित्तीय रिकॉर्ड्स में प्रथम दृष्टया कमियां हैं।
आदेश के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:

जांच अधिकारी की नियुक्ति: दिल्ली की सीए फर्म ‘विनीत संदेश एंड एसोसिएट्स’ को आधिकारिक जांच अधिकारी नामित किया गया है।
व्यापक जांच का दायरा: जांच वर्ष 2023-2024 से लेकर अब तक के सभी वित्तीय अभिलेखों, चल-अचल संपत्तियों और बैंक खातों की होगी।
समय सीमा: जांच अधिकारी को 04 सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
जवाबदेही तय करना: यदि जांच में अनियमितताएं सही पाई जाती हैं, तो दोषी पदाधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

निवासियों की मांग: पारदर्शिता और वसूली—
पीड़ित निवासियों ने मांग की है कि फंड के दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय की जाए और बिल्डर से पूरी बकाया राशि वसूल की जाए। निवासियों का आरोप है कि पिछली कमेटियों ने जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) में इन ऑडिट रिपोर्टों को पेश नहीं किया और तथ्यों को छिपाया।




