शुक्र ग्रह के उच्च-नीच, मुलत्रिकोणी, स्वराशि अंश और फल
शुक्र मीन राशि के 1 से 27 अंश में उच्च रहता हैं।
उच्च के शुक्र से स्त्री की वजह से धननाश, विरोध, धनहानि, पिता को पीड़ा, शिरोरोग, राजसम्मान आदि फल मिलते हैं।
शुक्र कन्या राशि के 1 से 27 अंश में नीच रहता हैं।
नीच शुक्र की वजह से उद्विग्नता, व्याधि, निरर्थक कार्य, शरीर पीड़ा, पत्नी-पुत्र को पीड़ा, धनहानि आदि फल मिलते हैं।
शुक्र तुला राशि के 1 से 10 अंश में मुलत्रिकोणी रहता हैं।
मुलत्रिकोणी शुक्र क्रय-विक्रय कार्य में दक्षता, किर्ती, धनलाभ, कानूनी शिक्षा या जानकारी, अधिपत्य आदि फल देता हैं।
शुक्र वृषभ राशि के 1 से 30 अंश में और तुला राशि के 11 से 30 अंश में स्वराशि का रहता हैं।
स्वगृही शुक्र पत्नि-पुत्र सुख, धनलाभ, पराक्रम, उत्साह, परोपकार, महत्व, आदि फल देता हैं।
नोट: किसी भी ग्रह की केवल एक स्थिति को देखकर उसकी संपूर्ण भविष्यवाणी नहीं करनी चाहिए।
आज के लिए इतना ही, फिर मिलते हैं अगले भाग में।
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