सूतजी के कथन अनुसार बुध के पुत्र पुरूरवा हुए, जो बड़े विद्वान, तेजस्वी, दानशील, यज्ञकर्ता तथा अधिक दक्षिणा देनेवाले थे।
वे ब्रह्मवादी, पराक्रमी तथा शत्रुओं के लिये दुर्धर्ष थे। निरन्तर अग्निहोत्र करते और यज्ञों के अनुष्ठान में संलग्न रहते थे। सत्य बोलते और बुद्धि को पवित्र रखते थे।
तीनों लोकों में उनके समान यशस्वी दूसरा कोई नहीं था। वे ब्रह्मवादी, शान्त, धर्मज्ञ तथा सत्यवादी थे। इसीलिये यशस्विनी उर्वशीने मान छोड़कर उनका वरण किया।
राजा पुरूरवा उर्वशी के साथ पवित्र स्थानों में उनसठ वर्षों तक विहार करते रहे। उन्होंने महर्षियोंद्वारा प्रशंसित (1. अ. जा.) प्रयाग में राज्य किया।

अधिक जानकारी
1. प्रयाग – प्रयाग उत्तर प्रदेश में हैं। मुगल सत्ता के कमजोर होने और अंग्रेजी हुकूमत के दौरान इलाहाबाद ही उसका औपचारिक नाम बन गया। लेकिन, साल 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद नाम बदलकर एक बार फिर ऐतिहासिक नाम प्रयागराज रख दिया।

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