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Part – 7 pm ke pen se bate brahma puran ki :- इला और सुद्युम्न की कथा

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इला और सुद्युम्न की कथा

ब्रम्हपुराण में लोमहर्षण सूतजी कहते हैं। 

एक समय की बात हैं। प्रजापति मनु को कोई पुत्र प्राप्ति नहीं हुई थी इसलिए पुत्र प्राप्ति की इच्छा से वह (1.अ. जा.) मैत्रावरुण यज्ञ कर रहे थे।

उस यज्ञ में मित्रावरुण के अंश की आहुति दी गयी थी। उसमें से दिव्य वस्त्र और आभूषणों से विभूषित दिव्य रूपवाली इला नाम की कन्या उत्पन्न हुई।

उस कन्या को मनुने (2.अ. जा.) “इला” कहकर पुकारा और अपने पास बुला लिया। तब इला ने धर्मयुक्त वचनों से कहा महाराज! ‘मैं मित्रवरुण के अंश से उत्पन्न हुई हूँ, अतः पहले उनके पास जाऊँगी। आप मेरे धर्म में बाधा न डाले’

मनु के यहां से वह मित्रावरुण के पास गई वहाँ उन्हें हाथ जोड़कर बोली, ‘भगवन मैं आप दोनों के अंश से उत्पन्न हुई हूँ, मनुने मुझे अपने पास बुलाया हैं। आप बताये मैं क्या करु? आपकी आज्ञानुसार मैं वहीं करूँगी।

उसके विनय, इंद्रियसंयम और सत्य से प्रसन्न होकर मित्रवरुण बोले, ‘तुम हम दोनों की कन्या के रूप में प्रसिद्ध होगी। तुम ही मनु के वंश का विस्तार करनेवाला पुत्र बन जाओगी। उस समय तीनो लोकों में (3.अ. जा.) सुद्युम्न नाम से तुम्हे ख्याति प्राप्त होगी।

इसके बाद इला वापस लौटी तो रास्ते में उसकी भेंट (4.अ. जा.) बुध से हुयी। बुधने उसे मैथुन के लिए आमंत्रित किया। बुध और इला के मैथुन से पुरुरवा का जन्म हुआ। उसके बाद इला सुद्युम्न के रूप में बदल गयी।

सुद्युम्न के तीन पुत्र हुए उत्कल, गय और विनताश्व।

उत्कल की राजधानी उत्कला (उड़ीसा) हुई। गय पूर्व दिशा के राजा हुए उनकी राजधानी गया नाम से प्रसिद्ध हुई। विनताश्व पश्चिम दिशा के राजा हुये। (इनका राज्य कौनसा था इस बारें में नहीं लिखा गया हैं।)

जब मनु सूर्य के तेज में प्रवेश करने लगे, तब उन्होंने अपने राज्य को दस भागों में बाँट दिया।

सुद्युम्न चूंकि कन्या रूप में (इला) उत्पन्न हुआ था, इसलिए उन्हें राज्य का भाग नहीं मिला। सुद्युम्न के बाद मनु के पुत्र इक्ष्वाकु सबसे बड़े थे इसलिये उनको मध्य देश का राज्य मिला।

वशिष्ठ जी के कहने पर बाद में सुद्युम्न को प्रतिष्ठाणपुर का राज्य मिला। उस प्राप्त राज्य को सुद्युम्न ने पुरुरवा को दे दिया।

अधिक जानकारी

1. मैत्रावरुण – एक ऋषि जो मैत्रात्रावरुण के पुत्र थे। एक पौराणिक ऋषि जो सूर्यवंशी राजाओं के पुरोहित थे। “मैत्रावरुण” शब्द दो शब्दों “मित्र” और “वरुण” का एक संयोजन है। “मित्र” और “वरुण” दोनों ही वैदिक धर्म के महत्वपूर्ण देवता हैं, जो क्रमशः मैत्री और जल से जुड़े हैं।

2.&3. इला, सुद्युम्न – इला और सुद्युम्न हिंदू धर्म में एक ही व्यक्ति के दो रूप हैं। इला एक महिला रूप में है, जबकि सुद्युम्न पुरुष रूप में है। वह वैवस्वत मनु की पुत्रि/पुत्र है और चंद्र वंश की संस्थापक है। इला की कहानी में, वह पुरुष रूप में सुद्युम्न, फिर स्त्री रूप में इला, फिर पुरुष रूप में सुद्युम्न और फिर स्त्री रूप में इला का रूप धारण करती हैं। इला की कहानी को पद्मपुराण में और भी विस्तार से बताया गया हैं। हम वह कथा भी आपको बतायेंगे लेकिन पद्मपुराण विभाग में।

4. बुध – यह बुध ग्रह हैं।

इस कहानी में इतना ही।

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