Homeअमेठीछात्राएं बोलीं 30 किमी दूर भेजने से डर रहे अभिभावक

छात्राएं बोलीं 30 किमी दूर भेजने से डर रहे अभिभावक

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अमेठी –  संग्रामपुर व अमेठी क्षेत्र में 20 से अधिक इंटर कॉलेज हैं। यहां से इंटरमीडिएट पास करने के बाद छात्र-छात्राओं को सरकारी डिग्री कॉलेज में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए 30 किमी दूर जाना पड़ता है। छात्राओं ने क्षेत्र में ही डिग्री कॉलेज बनवाने की मांग उठाई है। कहा कि इतनी दूर जाकर पढ़ाई करना कमजोर आय वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए संभव नहीं है। ऐसे परिवार के मेधावी बच्चे उच्च शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। अमेठी तहसील क्षेत्र में एक भी सरकारी महाविद्यालय नहीं है। तहसील क्षेत्र में प्रतिवर्ष करीब तीन से चार हजार से अधिक छात्र-छात्राएं इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण कर उच्च शिक्षा के लिए प्रयास तो करते हैं, लेकिन उनमें गरीब तबके के सैकड़ों बच्चे क्षेत्र में सरकारी महाविद्यालय न होने के कारण निजी कॉलेज नहीं जा पाते। संग्रामपुर व अमेठी के ककवा महराजपुर से मुसाफिरखाना की दूरी करीब 30 किमी है। छात्र तो किसी तरह वहां जाकर पढ़ाई कर लेते हैं, लेकिन दूरी ज्यादा होने के कारण बालिकाओं को अधिक समस्या होती है। प्रधानाचार्य जितेंद्र मिश्र ने बताया कि उच्च शिक्षा के लिए क्षेत्र में एक सरकारी महाविद्यालय होना आवश्यक है। अगर तहसील मुख्यालय पर एक सरकारी महाविद्यालय का निर्माण हो जाए तो गरीब तबके की छात्राओं को शिक्षा ग्रहण में परेशानी नहीं होगी। ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं में पढ़ने की रुचि रहती है, लेकिन इंटर के बाद जिन परिवारों की स्थिति ठीक नहीं रहती, वे छात्राओं की पढ़ाई बंद करा देते हैं। टीकरमाफी निवासी शिवानी ने बताया कि गांव की कई छात्राएं इंटर के बाद आगे की पढ़ाई नहीं कर पाईं। उनके परिजनों ने सड़क हादसों के भय से डग्गामार बस व टेंपो से मुसाफिरखाना के महाविद्यालय जाने की स्वीकृत नहीं दी। वहां जाने-आने में ही प्रतिदिन 100 रुपये से अधिक किराया खर्च हो जाता है। सोनारी निवासी कृष्णा ने बताया कि गांव के परिषदीय स्कूल के बाद राजकीय इंटर काॅलेज टीकरमाफी में 12वीं की पढ़ाई कर रहे हैं। इंटर करने के बाद अब महाविद्यालय की पढ़ाई करने में समस्या आएगी। भादर की उमा ने बताया कि गांव से टीकरमाफी तक साइकिल से आना-जाना हो जाता है, लेकिन 30 किमी दूर साइकिल से जाना संभव नहीं है। तिवारीपुर निवासी मधु ने बताया कि घरवालों के ऊपर बहुत जिम्मेदारी है। इतनी दूर प्रतिदिन किराया देकर पढ़ा पाना उनके बस की बात नहीं है। संग्रामपुर निवासी अमरेश कुमार ने बताया कि आर्थिक स्थिति ठीक नही है, बेटी को इंटर के बाद पढ़ा नहीं पाए।
 

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