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Kab Hai Nag Panchmi: 16 या 17 अगस्त… इस साल कब मनाई जाएगी नाग पंचमी?

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Nag Panchami Date and Time: सनातन धर्म में नाग पंचमी के त्योहार के दिन नाग देवता की पूजा की जाती है. हर साल श्रावण में शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है. इस दिन नाग देवता की पूजा करने को प्रकृति के प्रति श्रद्धा का प्रतीक माना गया है. वहीं, नाग देवता भगवान शिव के गले का आभूषण हैं. यही वजह है कि नागों की विधिवत पूजी की जाती है और उनसे परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की रक्षा व भय से मुक्ति की कामना की जाती है. अब सवाल खड़ा हो रहा है कि इस साल कब नाग पंचमी मनाई जाएगी?

द्रिक पंचांग के मुताबिक, इस साल पंचमी तिथि 19 अगस्त को शाम 4 बजकर 52 मिनट से शुरू हो रही है और 17 अगस्त शाम 05 बजे तक रहेगी. इस बार तिथि को लेकर कोई कंफ्यूजन नहीं है क्योंकि उदिया तिथि में यानी 17 अगस्त को ही नाग पंचमी मनाई जाएगी. नाग पंचमी के दिन पूजा के शुभ मुहूर्त की बात करें तो सुबह 5 बजकर 51 मिनट से लेकर 8 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. पूजा के मुहूर्त का समय 2 घंटे 37 मिनट तक रहने वाला है.

12 प्रकार के नागों की होती है पूजा

नाग पंचमी के दिन सर्पों का किया गया पूजन नाग देवताओं के समक्ष पहुंच जाता है. इस दिन 12 प्रकार के नागों की पूजा की जाती है, जिसमें अनन्त, वासुकी, शेष, पद्म, कंबल, कर्कोटक, अश्वतर, धृतराष्ट्र, शंखपाल, कालिया, तक्षक और पिंगल नाम शामिल होते हैं. नाग देवताओं की मूर्तियों की पूजा में दूध, मिठाई, फूल और दीयों का इस्तेमाल किया जाता है. कई जगहों पर लोग असली सांपों को दूध भी पिलाते हैं.

नाग पंचमी का क्या है धार्मिक महत्व?

मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने के पीछे एक विशेष धार्मिक महत्व है. इस दिन पूजा करने से कालसर्प दोष और सर्प दोष का प्रभाव कम हो जाता है. यही नहीं, राहु-केतु से जुड़े अशुभ प्रभाव कम होते हैं. साथ ही साथ घर में सुख-शांति आती है और अकाल मृत्यु का भय खत्म हो जाता है. वासुकी नाग शिव का आभूषण होने की वजह से दिव्य शक्तियों का प्रतीक माए गए हैं. इसके अलावा भगवान विष्णु की शैया पर शेषनाग इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं.

नाग पंचमी की पूजा में इन मंत्रों का करें जाप

सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले।

ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः॥

ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः।

ये च वापीतडगेषु तेषु सर्वेषु वै नमः॥

मंत्र का अर्थः इस संसार में आकाश, स्वर्ग, झीलें, कुएं, तालाब और सूर्य-किरणों में निवास करने वाले सर्प, हमें आशीर्वाद दें. हम सभी आपको बारम्बार नमन करते हैं.

अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।

शङ्ख पालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥

एतानि नव नामानि नागानां च महात्मनाम्।

सायङ्काले पठेन्नित्यं प्रातःकाले विशेषतः।

तस्य विषभयं नास्ति सर्वत्र विजयी भवेत्॥

मंत्र का अर्थः नौ नाग देवताओं के नाम अनन्त, वासुकी, शेष, पद्मनाभ, कंबल, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक तथा कालिया हैं. यदि प्रतिदिन प्रातःकाल नियमित रूप से इनका जप किया जाता है, तो नाग देवता आपको समस्त पापों से सुरक्षित रखेंगे व आपको जीवन में विजयी बनाएंगे.

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