दिव्य दृष्टियाँ और सैटेलाइट सिस्टम PM Ke Pen Se
दिव्य दृष्टियाँ और सैटेलाइट सिस्टम
इस भाग में हम दुनियाभर के धर्मग्रंथों के पात्रों को उनकी दिव्य दृष्टियाँ कैसे मिली? और उस दिव्यदृष्टि का उन्होंने कैसे इस्तेमाल किया? सैटेलाइट सिस्टम और दिव्यदृष्टि का आपसी कनेक्शन क्या हैं? इसे समझने की कोशिश करेंगे।
महाभारत में संजय को महर्षि वेदव्यास ने दिव्य दृष्टि दी थी, जिससे उन्होंने महल में बैठकर कुरुक्षेत्र के युद्ध का सजीव हाल धृतराष्ट्र को सुनाया था।
दुनिया के अन्य प्रमुख धर्मग्रंथों, पौराणिक कथाओं और इतिहास में भी ऐसे कई अद्भुत पात्र मिलते हैं, जिनके पास दूरदृष्टि (Clairvoyance/Prophecy), भविष्य देखने या दूर की घटनाओं को सीधे देख लेने की अलौकिक क्षमता थी।
आईये दुनिया भर के धर्मग्रंथों और प्राचीन कथाओं से जुड़े ऐसे ही प्रमुख पात्रों की जानकारी लेते हैं।
यहूदी और ईसाई धर्मग्रंथ (बाइबिल) में अब्राहमिक परंपराओं में ऐसे पात्रों को ‘नबी’ (Prophet/द्रष्टा) कहा गया है, जिन्हें ईश्वर सीधे भविष्य या दूर की घटनाओं का दर्शन कराते थे।
दानिय्येल (Daniel): बाइबिल के ‘बुक ऑफ दानिय्येल’ में; दानिय्येल को एक महान द्रष्टा बताया गया है। राजा नबूकदनेस्सर के उन सपनों का अर्थ दानिय्येल ने हूबहू बता दिया था, जिन्हें राजा खुद भूल चुके थे। उन्हें भविष्य के साम्राज्यों के उत्थान और पतन की स्पष्ट दूरदृष्टि (Visions) मिलती थी।
यहेजकेल (Ezekiel): इन्हें दूर बैठे ही यरुशलम में हो रही घटनाओं और मंदिर के विनाश के दृश्य (Visions) दिखाई देते थे, ठीक वैसे ही जैसे संजय को कुरुक्षेत्र का युद्ध दिखता था।
यूहन्ना (John the Apostle): न्यू टेस्टामेंट की आखिरी किताब ‘प्रकाशन वाक्य’ (Book of Revelation) में सेंट जॉन को ईश्वर द्वारा एक दिव्य दृष्टि दी गई थी, जिससे उन्होंने दुनिया के अंत (Apocalypse) और भविष्य की घटनाओं को हूबहू देखा और लिखा।
ग्रीक (यूनानी) पौराणिक कथाएँ और धर्म:
यूनानी ग्रंथों में दूरदृष्टि और भविष्य देखने वाले पात्रों को ‘ओरेकल’ (Oracle) या द्रष्टा कहा जाता था।
टायरेसियस (Tiresias): यह यूनानी पौराणिक कथाओं के सबसे प्रसिद्ध अंधे द्रष्टा (Blind Prophet) हैं। शारीरिक रूप से अंधे होने के बावजूद, भगवान अपोलो ने इन्हें भविष्य और दूर की घटनाओं को देखने की अद्भुत आंतरिक दिव्य दृष्टि दी थी।
कैसैंड्रा (Cassandra): ट्रॉय की राजकुमारी कैसैंड्रा को भगवान अपोलो से सीधे भविष्य देखने का वरदान मिला था। हालाँकि, एक श्राप के कारण उनकी सटीक दूरदृष्टि पर कोई विश्वास नहीं करता था, जिसके कारण ट्रॉय का विनाश हुआ।
इस्लाम और सूफी परंपराएँ:
इस्लामिक इतिहास और सूफी दर्शन में दूर की घटनाओं को देख लेने या जान लेने की क्षमता को ‘कश्फ़’ (Kashf/रहस्योद्घाटन) या ‘बसीरत’ (Spiritual Insight) कहा जाता है।
हज़रत ख़िज़्र (Al-Khidr): कुरान और इस्लामिक कथाओं में इनका उल्लेख एक ऐसे रहस्यमयी मार्गदर्शक के रूप में है, जिनके पास ईश्वर द्वारा दी गई ‘लदुन्नी विद्या’ (Divine Knowledge) थी। वे भविष्य में होने वाली घटनाओं के परिणाम को पहले से देखकर ही वर्तमान में कदम उठाते थे।
संदेह निवारक घटना (खलीफा उमर): इस्लामिक इतिहास में एक प्रसिद्ध घटना आती है जब मदीना में मिंबर (मंच) पर खड़े खलीफा उमर ने सैकड़ों मील दूर न्हावंद के युद्ध में लड़ रही अपनी सेना के कमांडर सारिया को खतरे में देखा और वहीं से चिल्लाए, “सारिया! पहाड़ की ओट लो।” उनकी यह आवाज सेनापति तक पहुँची और युद्ध का पासा पलट गया। यह घटना काफी हद तक संजय की दिव्य दृष्टि से मेल खाती है।
नॉर्डिक (वाइकिंग) पौराणिक कथाएँ: हेमडाल (Heimdall): वाइकिंग देवताओं में हेमडाल को देवताओं के घर (Asgard) का पहरेदार माना जाता है। उनके पास ऐसी दिव्य दृष्टि और सुनने की क्षमता थी कि वे सैकड़ों मील दूर देख सकते थे। यहाँ तक कि वे रात के अंधेरे में भी उतनी ही दूर देख सकते थे जितना दिन में, और घास के उगने तक की आवाज सुन सकते थे।
यहाँ तक हमने धर्मग्रन्थों और पौराणिक कथाओं में दिव्यदृष्टाओं की जानकारी ली हैं। इन सभी पात्रों की दिव्यदृष्टियाँ आज के सैटेलाइट की तरह काम करती होगी। आईये आज की दिव्यदृष्टियाँ याने, सैटेलाइट पर भी एक नजर डालते हैं।
दुनिया का पहला कृत्रिम उपग्रह Sputnik 1 था, जिसे 4 अक्टूबर 1957 को सोवियत संघ (अब के रूस) ने अंतरिक्ष में भेजा था। एक बीच बॉल की तरह 58 सेंटीमीटर (22 इंच) व्यास का यह स्पूतनिक उपग्रह पृथ्वी का एक चक्कर लगभग 98 मिनट में पूरा करता था।
भारत का पहला उपग्रह आर्यभट्ट था जो 19 अप्रैल 1975 को लॉंच किया गया था। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इसका निर्माण किया था और सोवियत संघ (रूस) के कपुस्टिन यार से सोवियत कॉसमॉस-3एम रॉकेट द्वारा इसका प्रक्षेपण हुआ था।
जनवरी और मई 2026 में भारत ने दिव्यदृष्टि नाम से सैटेलाइट लॉंच किया हैं जिसकी तकनीक बादलों को भेदकर या अंधेरे में भी ज़मीन की साफ तस्वीर ले सकती है। जिसे एक प्रकार से अंतरिक्ष की ‘दिव्य दृष्टि’ कहा जाता है।
भारत का प्रमुख और ताज़ा निगरानी (Surveillance/Earth Observation) सैटेलाइट; जियोसिंक्रोनस कक्षा में रहकर, लगभग 36,000 किलोमीटर की ऊँचाई से, देश की भौगोलिक स्थिति और सीमाओं पर नज़र रखता है।
दुनिया का सबसे शक्तिशाली और आधुनिक निगरानी उपग्रह (Spy/Reconnaissance Satellite) आधिकारिक तौर पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी NRO (National Reconnaissance Office) द्वारा संचालित KH-11 KENNEN (Crystal) सीरीज को माना जाता है।
इस प्रकार के सैटेलाइट्स की सटीक क्षमताएं और नाम पूरी तरह गुप्त (Classified) रखे जाते हैं, लेकिन उपलब्ध रक्षा जानकारियों के आधार पर यह पृथ्वी से लगभग 300 से 400 किलोमीटर ऊपर लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में रहकर भी जमीन पर 10 सेंटीमीटर तक की छोटी वस्तु को बिल्कुल साफ देख सकता है और रियल-टाइम तस्वीरें भेजता है।
NISAR (NASA-ISRO): भारत (ISRO) और अमेरिका (NASA) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया यह दुनिया का सबसे महंगा और शक्तिशाली अर्थ-ऑब्जर्वेशन रडार सैटेलाइट है। इसके ड्यूल-फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) तकनीक की मदद से यह घने बादलों, जंगलों और अंधेरे में भी धरती के कोने-कोने पर सटीक नजर रख सकता है।
Yaogan Constellation (चीन): चीन के पास 470 से अधिक उपग्रहों का एक विशाल नेटवर्क है, जो बादलों के पार भी अमेरिकी युद्धपोतों (Aircraft Carriers) और सैन्य गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए अत्याधुनिक रडार (SAR) और इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करता है।
सिग्नल और जासूसी (Signals Intelligence): Orion/Mentor (अमेरिका)
यह सैटेलाइट पृथ्वी से 36,000 किलोमीटर दूर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट (GEO) में तैनात होते हैं। इनमें अंतरिक्ष में खुलने वाला 100 मीटर से बड़ा डिश एंटीना लगा होता है, जो जमीन पर हो रहे रेडियो, मोबाइल फोन और सैन्य सिग्नलों को अंतरिक्ष से ही इंटरसेप्ट (हैक) कर लेता है।
वैज्ञानिक रिपोर्ट्स के अनुसार, चीनी वैज्ञानिकों ने एक नई लेजर-आधारित तकनीक (Synthetic Aperture Lidar – SAL) का परीक्षण किया है जो भविष्य में अंतरिक्ष से इंसानी चेहरों को भी पहचानने का दावा करती है।
आजतक युग बदलते गये हैं, लेकिन घटनाएं वहीं घट रही हैं। लोगों की आंतरिक शक्तियाँ, आज के दौर में मशीनों को मिल चुकी हैं। आज के सैटेलाइट युग में, हर आम और खास आदमी को सैटेलाइट और आधुनिक उपकरणों की मदद से दिव्यदृष्टि प्राप्त हो चुकी हैं। वह जहाँ बैठा हैं, वही से दुनियाभर की नॉलेज हासिल कर रहा हैं।
दिव्यदृष्टि से सैटेलाइट, टेलीपैथी से टेलीफोन, स शरीर ब्रम्हांड भ्रमण से एस्ट्रोनॉट तक का सफर तय करके हम किसी ना किसी रुप में दिव्यदृष्टि का अनुभव कर चुके हैं। कभी पौराणिक कथाओं के माध्यम से तो कभी आधुनिक विज्ञान के माध्यम से, हमें दिव्यदृष्टियों की जानकारी मिलती रही हैं।
हम आगे भी इस प्रकार की खोजपूर्ण जानकारी आप तक लाते रहेंगे। आपके पास भी कोई जानकारी हो तो हमें शेअर करें।
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