बाराबंकी। जनता की सहूलियत की जगह पैसा बनाने में मस्त जनप्रतिनिधियों के चलते जहां शासन-प्रशासन बेलगाम है, तो वहीं अब कार्यदायी संस्था के ठेकेदारों को भी शिकायत क्या, कार्रवाई का डर दिल में नहीं रह गया है। अगर ऐसा ना होता तो नगर पालिका परिषद के ईओ द्वारा जिम्मेदार कर्मचारी व अधिकारी को निर्देशित करने पर भी कार्यदायी संस्था के ठेकेदार बनते ही गड्ढे में तब्दील इंटरलाॅकिंग की 3-4 दिन बाद भी जहां मरम्मत नहीं कर पाए। तो वहीं नगर पालिका परिषद की रुपये 5.65 करोड़ लागत की अति महत्वाकांक्षी मॉडल रोड का प्रयास भा तत्कालीन डीएम द्वारा बेहतरी के लिए आवास विकास परिषद कार्यदायी संस्था को सौंपने के बावजूद प्रयास की हवा कुस इस तरह निकली कि नाला तक ना सिर्फ आधा अधूरा बना बल्कि पानी निकास के लिए ना बनता देख दुकानदारों को अपने राजगीर व मजदूर लगवाकर पुराने बने नाले में नया खोदा आधा अधूरा नाला जोड़कर पटवाने को मजबूर होना पड़ा। तो मार्ग के किनारे कोर्ट के सामने से एंथोनी मोड़ तक बनी नाली में शिकायतों बावजूद घटिया स्तर की ईंट व मसाले का खुलेआम प्रयोग कार्यदायी संस्था के ठेकेदार द्वारा किया गया। जिसमें आवास विकास के संबंधित अधिशाषी अभियंता यह तक नहीं बता सके कि 5.65 करोड़ का प्रस्तावित स्टीमेट आधे अधूरे में कैसे खत्म हो गया। साथ ही कहीं स्टेशन पर तो कहीं दूसरे स्थानों पर प्रस्तावित नक्शे को दरकिनार कर नाला व मार्ग घुमाया व संकरा कैसे हो गया? जबकि सरकार की जीरो टॉलरेंस की पॉलिसी लागू है।
बताते चलें कि इसी तरह शहर के मोहल्ला पीरबटावन पश्चिमी वार्ड नंबर 27 में दो तीन माह पूर्व बना इंटरलॉकिंग मार्ग पहली ही बरसात में भारी भ्रष्टाचार के ढ़ोल की पोल खोलते हुए कुछ इस तरह धंस गया कि कई जगह बड़े खाई नुमा गड्ढे हो गए। जानकारी अनुसार शहर के वार्ड पश्चिमी पीरबटावन फूल बाग मस्जिद रोड पत्रकार के घर के सामने ही दो से तीन माह पूर्व बनी रोड को उखाड़ कर पुनः रोड का निर्माण कराया गया था। जिसपर एक सप्ताह से जोकि हल्की बारिश में अलग अलग दो जगह रोड धसने से एक अज्ञात बाइक चालक गिर कर चोटिल भी हो चुका है।
बताते चलें कि नवनिर्मित धंसी रोड को लेकर गुरुवार को नगर पालिका परिषद नवाबगंज के ईओ संजय कुमार शुक्ला से शिकायत करने पर उन्होंने तुरंत संबंधित महिला अधिकारी को प्रकरण का संज्ञान लेकर जांच करते हुए तत्काल कार्यदायी संस्था के ठेकेदार द्वारा नवनिर्मित मार्ग की मरम्मत करवाने के लिए सख्त निर्देश दिया। जिसपर संबंधित महिला अधिकारी ने संबंधित स्थान का हवाला लेते हुए ठेकेदार को निर्देशित भी किया। ठेकेदार से फोन से दो बार वार्ता होने के बाद भी अभी तक समस्या का हल नहीं हुआ है।
यहां यह भी बताना जरूरी है कि भारी भ्रष्टाचार की स्थिति बेकाबू इसलिए भी है कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों में भी कई स्वयं ठेकेदारी से लेकर विकास के नाम पर बंदरबांट में लगे हैं। तो कई भूमाफियाओं की भूमिका में इतने बेलगाम हैं कि प्रशासन तो छोड़िए मीडिया के विज्ञापन तक का हजारों रूपए मारे बैठे हैं। यहीं नहीं गरीबों के मोहल्लें में जमीन कब्जे के प्रयास में गरीबों का पक्ष उजागर कर जिला प्रशासन को हस्ताक्षेप पर करने पप संबंधित मीडिया कर्मियों को धमकी तक का प्रयास भी सुर्खियों में आया, लोग भी चिन्हित हुए, लेकिन भाजपा की जीरो टॉलरेंस नीति का बाजा बज गया पर इन पर कार्रवाई मुकम्मल नही हो सकी।




