10 / 100 SEO Score

नई दिल्ली। सनातन धर्म में चातुर्मास को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक साधना का काल माना जाता है। यह अवधि देवशयनी एकादशी से शुरू होकर देवउठनी एकादशी तक चलती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान भगवान श्रीहरि विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार महीने तक विश्राम करते हैं। वर्ष 2026 में चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू होकर 20 नवंबर तक रहेगा।

चातुर्मास केवल शुभ कार्यों पर रोक का समय नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, तपस्या, दान, जप और भगवान की आराधना का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि इन चार महीनों में किया गया पुण्य कई गुना अधिक फल देता है।

चातुर्मास क्या है?

‘चातुर्मास’ का अर्थ है चार महीनों का विशेष काल। यह आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चलता है। इस दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं, इसलिए मांगलिक कार्यों को स्थगित कर दिया जाता है।

2026 में चातुर्मास कब से कब तक?

  • आरंभ: 25 जुलाई 2026 (देवशयनी एकादशी)
  • समापन: 20 नवंबर 2026 (देवउठनी एकादशी)

चातुर्मास में किन कार्यों पर रहती है रोक?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में—

  • विवाह
  • गृह प्रवेश
  • मुंडन संस्कार
  • उपनयन संस्कार
  • भूमिपूजन
  • नए भवन का निर्माण
  • बड़े शुभ समारोह
  • कई परिवारों में नई संपत्ति व वाहन खरीदना भी टाल दिया जाता है।

क्यों नहीं किए जाते शुभ कार्य?

मान्यता है कि जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं तो सृष्टि के पालन से जुड़े शुभ कार्य स्थगित माने जाते हैं। इसलिए विवाह और अन्य मांगलिक कार्य देवउठनी एकादशी के बाद ही शुरू किए जाते हैं।

चातुर्मास में क्या करना चाहिए?

  • भगवान विष्णु की पूजा
  • श्रीमद्भागवत कथा श्रवण
  • विष्णु सहस्रनाम पाठ
  • गीता पाठ
  • जप एवं ध्यान
  • तुलसी पूजा
  • दान-पुण्य
  • सत्संग एवं भजन-कीर्तन
  • व्रत और संयम

साधु-संत क्यों नहीं करते यात्रा?

सनातन परंपरा के अनुसार वर्षा ऋतु में साधु-संत एक स्थान पर रहकर धर्म प्रचार, प्रवचन और साधना करते हैं। इसे चातुर्मास वास कहा जाता है।

आध्यात्मिक दृष्टि से क्यों है विशेष?

शास्त्रों में कहा गया है कि चातुर्मास मन, वाणी और कर्म की शुद्धि का समय है। इस दौरान सात्विक भोजन, संयमित जीवन और ईश्वर भक्ति का विशेष महत्व है।

निष्कर्ष

चातुर्मास केवल शुभ कार्यों पर रोक का समय नहीं बल्कि जीवन को आध्यात्मिक दिशा देने का अवसर है। भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए इन चार महीनों में भक्ति, दान, तप और सत्संग को सर्वोत्तम माना गया है।


10 / 100 SEO Score

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Verified by MonsterInsights