सनातन धर्म में सावन मास का विशेष महत्व माना जाता है। इसी पावन महीने में आने वाली हरियाली तीज सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं का सबसे महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। वर्ष 2026 में हरियाली तीज 15 अगस्त को मनाई जाएगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं। वहीं अविवाहित कन्याएं मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं।
कैसे हुई हरियाली तीज की शुरुआत?
पौराणिक कथा के अनुसार पर्वतराज हिमालय की पुत्री माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की। कहा जाता है कि उन्होंने लगातार 107 जन्मों तक तप किया और 108वें जन्म में भगवान शिव ने उनकी भक्ति स्वीकार कर उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
इसी दिन को हरियाली तीज के रूप में मनाया जाने लगा। तभी से महिलाएं माता पार्वती के आदर्श का अनुसरण करते हुए यह व्रत रखती हैं।
हरियाली तीज का धार्मिक महत्व—–
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से—
- अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है।
- दांपत्य जीवन सुखमय रहता है।
- पति की आयु लंबी होती है।
- अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है।
- घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
पूजा का विशेष महत्व—-
हरियाली तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा, श्रृंगार, सुहाग सामग्री अर्पित करना तथा व्रत कथा सुनना अत्यंत शुभ माना जाता है।
Disclaimer
यह वीडियो धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं एवं उपलब्ध पारंपरिक ग्रंथों पर आधारित जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। अलग-अलग परंपराओं एवं क्षेत्रों में मान्यताओं में भिन्नता संभव है। दर्शक किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पहले अपने गुरु, आचार्य या स्थानीय परंपरा के अनुसार निर्णय लें।



