सनातन धर्म के अनुसार बिना दीपक जलाए कोई भी पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। स्कंद पुराण सहित अनेक धार्मिक ग्रंथों में भगवान शिव के समक्ष विभिन्न प्रकार के तेल एवं घी के दीपक जलाने का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि श्रद्धा, विश्वास और विधि-विधान से दीपक अर्पित करने पर भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
आइए विस्तार से जानते हैं कि सावन में कौन-कौन से दीपक जलाने चाहिए, उनका धार्मिक महत्व क्या है और दीपदान करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। हिंदू पंचांग के अनुसार सावन माह भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले कालकूट विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। विष की तीव्रता को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर गंगाजल अर्पित किया। तभी से सावन में जलाभिषेक की परंपरा प्रारंभ हुई।
इस माह में शिव भक्त उपवास रखते हैं, कांवड़ यात्रा करते हैं, रुद्राभिषेक कराते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग तथा पुष्प अर्पित करते हैं। सावन का प्रत्येक सोमवार विशेष फलदायी माना जाता है। इस दौरान किया गया जप, तप, दान और पूजा कई गुना अधिक फल देने वाली मानी जाती है।
दीपक जलाने की परंपरा क्यों है
सनातन धर्म में दीपक केवल प्रकाश का साधन नहीं बल्कि ज्ञान, सकारात्मक ऊर्जा और ईश्वर की उपस्थिति का प्रतीक माना गया है। पूजा के समय दीपक जलाने का अर्थ है अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करके जीवन में ज्ञान और आध्यात्मिक प्रकाश का स्वागत करना।
भगवान शिव के सामने दीपक जलाने से वातावरण पवित्र होता है और मन एकाग्र होकर पूजा में लगता है। धार्मिक मान्यता है कि दीपक की लौ में देवशक्ति का वास होता है। इसलिए प्रत्येक पूजा, आरती और यज्ञ की शुरुआत दीप प्रज्वलन से की जाती है।
स्कंद पुराण में दीपदान का महत्व
स्कंद पुराण में दीपदान को अत्यंत पुण्यदायी कर्म बताया गया है। इसमें कहा गया है कि भगवान शिव के समक्ष उचित तेल अथवा घी का दीपक जलाने से पापों का क्षय होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
दीपदान के प्रमुख लाभ—
- भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
- आर्थिक उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
- मानसिक तनाव कम होता है।
- आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है।
- परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
- ग्रह दोषों की शांति में भी सहायता मिलती है।
सावन में शिव के सामने जलाएं इन चीजों का दीपक
कुसुम: सावन महीने के दौरान शिवलिंग के सामने कुसुम के तेल का दीपक जलाएं. ऐसा करने से भगवान शिव का आशिर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सुख और वैभव बढ़ता है.
अलसी: स्कंद पुराण के अनुसार, अलसी के तेल का दीपक कुसुम के तेल के ही सामान पुण्य देता है. सावन में सुबह या शाम में अलसी के तेल का दीपक जरूर जलाएं. इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं.
तिल: तिल के तेल को अत्यंत शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि तिल के तेल का दीपक जलाने से आध्यात्मिक ज्ञान मिलता है. साथ ही शिव जी की उपस्थिति महसूस होती है. सावन में तिल के तेल का दीपक जलाने से परिवार में खुशियां आती हैं.
घी: घी के दीपक को सभी दीपों में सबसे श्रेष्ठ माना जाता है. घी का दीपक भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. सावन में सुबह या शाम को भगवान शिव की आरती घी के दीपक से करें.
इन तेल और घी के अलावा स्कंद पुराण में पूजा के लिए कपूर, अगरु, धूप के उपयोग का भी महत्व बताया गया है. सावन में महादेव की पूजा में इन चीजों का उपयोग भी अवश्य करें.



