*सहारनपुर की रहने वाली हर्षिता अरोड़ा ने अपनी जिंदगी से यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी कमी रास्ता नहीं रोक सकती। एक संपन्न परिवार में जन्मी हर्षिता ने सहारनपुर के Pine Wood School से सिर्फ 8वीं तक पढ़ाई की, लेकिन बचपन से ही उनका मन किताबों से ज्यादा कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी में लगता था। महज 15 साल की उम्र में उन्होंने बड़ा फैसला लेते हुए स्कूल छोड़ दिया। इस फैसले से परिवार नाराज़ हो गया पिता रविन्द्र अरोड़ा और माता जसविंदर कौर हर्षिता के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई, लेकिन हर्षिता अपने लक्ष्य को लेकर अडिग रहीं। उन्होंने खुद से कोडिंग सीखनी शुरू की और धीरे-धीरे टेक्नोलॉजी की दुनिया में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। हर्षिता अरोड़ा बेंगलुरु पहुंचीं, जहां उन्होंने स्टार्टअप और टेक इकोसिस्टम को करीब से समझा और अपने हुनर को निखारा। महज 16 साल की उम्र में उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ा एक ऐप बनाया, जिसे बाद में एक कंपनी ने खरीद लिया, हालांकि इस डील की रकम सार्वजनिक नहीं की गई। उनकी प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय पहचान तब मिली जब उनका चयन Massachusetts Institute of Technology (MIT) से जुड़े एक प्रोग्राम के लिए हुआ, जहां उन्होंने दुनिया भर के टैलेंटेड युवाओं के साथ काम किया। साल 2018 उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जब उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “बाल शक्ति पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। इसी साल उन्होंने अमेरिका का रुख किया और वहीं स्थायी रूप से बस गईं। इसके बाद उनका सफर उन्हें दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप एक्सेलरेटर Y Combinator तक ले गया, जहां वह आज जनरल पार्टनर के पद पर कार्य कर रही हैं। हर्षिता अरोड़ा सिर्फ यहीं नहीं रुकीं, बल्कि उन्होंने AtoB नाम की एक फिनटेक स्टार्टअप को भी आगे बढ़ाया, जिसकी वैल्यूएशन आज करीब 700 मिलियन डॉलर (लगभग 5800 करोड़ रुपये) तक पहुंच चुकी है। खास बात यह है कि AtoB कंपनी अभी तक बेची नहीं गई है, बल्कि निवेशकों से सैकड़ों करोड़ रुपये की फंडिंग जुटाकर तेजी से आगे बढ़ रही है। सहारनपुर की 8वीं पास लड़की का यह सफर सिर्फ एक सफलता की कहानी नहीं, बल्कि एक सोच का बदलाव है—जहां डिग्री से ज्यादा स्किल और जुनून मायने रखते हैं। हर्षिता अरोड़ा आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का हौसला रखते हैं। उनकी कहानी साफ संदेश देती है—अगर आप अपने रास्ते खुद बनाने का साहस रखते हैं, तो छोटी शुरुआत भी आपको दुनिया की सबसे बड़ी ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।




