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वरिष्ठ समाजवादी नेता के निधन से शोक की लहर

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सिरौलीगौसपुर, बाराबंकी- किंतूर निवासी समाजवादी पार्टी केसमाजवादी पार्टीपूर्व केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के काफी करीबी रहे वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवकुमार यादव के आकस्मिक निधन से पूरे जनपद में शोक की लहर है। जहां पूर्व कारागार मंत्री राकेश वर्मा सहित तमाम गणमान्यों ने उनके अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल हो उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
प्राप्त जानकारी अनुसार क्षेत्र के ग्राम किन्तूर निवासी वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवकुमार यादव का लम्बी बीमारी के बाद शुक्रवार की रात निधन हो गया। निधन की सूचना पर पूर्व मंत्री राकेश कुमार वर्मा, जैदपुर विधायक गौरव रावत, छात्र सभा के जिलाध्यक्ष मोनू रावत एडवोकेट उमेश कुमार रावत सन्तोष, पसमांदा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन सहित सैकड़ों लोगों ने श्रद्वांजलि अर्पित करते हुए परिवार को ढांढस बंधाया। वहीं रामनगर विधायक हाजी फरीद महफूज किदवई खबर लिखे जाने तक नहीं पंहुचे।
बताते चलें कि गरीब किसान नौजवान की सदैव मदद करने वाले वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवकुमार यादव जो कि स्वर्गीय बेनी प्रसाद वर्मा, पूर्व विधायक स्वर्गीय राधेश्याम वर्मा के अत्यंत करीबी रहे, का जीवन संघर्षों से भरा रहा। उनके एक बेटी का जहां विवाह हो चुका है। वहीं स्वर्गीय सपा नेता के दो पुत्र भी हुए थे। जो जन्म से विकलांग थे व उनकी मृत्यु पहले ही हो चुकी है। अब घर में अपने पीछे दिवंगत नेता अपनी पत्नी को अकेला छोड़ गए हैं।
सपा नेता के निधन पर क्षेत्रीय विधायक के ना पहुंचने से अफवाहों की बाजार गर्म
सिरौलीगौसपुर। अपने देश की ऐसी परंपरा है कि सुख में लोग भले ही टाल जाएं लेकिन दुःख की घड़ी में पहुंचना, मदद करना नैतिक जिम्मेदारी है। लेकिन उठी चर्चाओं की मानें तो तमाम अपवादों में घिरे सपा से रामनगर विधायक शायद अलग ही मिट्टी के बने हैं।
बताते चलें यह कोई पहला मामला नहीं है जब सपा के स्व. मुलायम सिंह व बेनी बाबू के करीबी नेताओं ने निधन व अंतिम संस्कार पर सपा के कद्दावर नेताओं ने शर्मनाक ढ़ंग से किनारा किया हो। लोगों को याद हो तो जनपद के पूर्व सदर विधायक रहे छोटेलाल यादव ने भी इन स्वयंभू नेताओं की नीति के चलते ही जहां पार्टी छोड़ बेनी बाबू का हाथ थाम कांग्रेस में चले गए थे व अंतिम समय भाजपा की सदस्यता मजबूरी में ग्रहण की थी उनके अंतिम संस्कार में सपा के पूर्व सांसद व जमीनी नेता राम सागर ने भी अंतिम संस्कार पर ना पहुंचने पर जहां सवालिया निशान लगाते हुए इसे असमाजिक कृत्य बताते हुए समाजवादी विचारधारा के खिलाफ व्यवहार तक बता दिया था। वहीं सब चर्चाएं यहां भी क्षेत्रीय विधायक के साथ कद्दावर नेताओं के जमीनी नेता की अंतिम विदाई पर किनारा करने वालों को लेकर उठीं।तो बहुतों ने बहुत कुछ कहा तो कुृछ ने इसे सपा की खिसकती जमीन तक का हवाला तक दिया।
मजे की बात तो चर्चाओं में सामने ये आई कि स्व.छोटेलाल भी यादव और यहां भी शिवकुमार भी यादव साथ ही यादवों की ही बनाई पार्टी में यादवों से ही किनारा? तो लोग कुछ तो कहेंगे ही। फिर याद कुछ लोगों ने यह भी दिलाया कि मुलायम सिंह को राजनीति में लाने वाले राम सेवक यादव से ही जब कुछ अपनी तुलना करने में नहीं चूके तो अब तो सब संभव है, लेकिन पार्टी की भविष्य के लिए नहीं।

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