फ्लाईंग किस स्टोरी PM Ke Pen Se Flying Kiss Story by PM’s pen
फ्लाईंग किस स्टोरी PM Ke Pen Se
Flying Kiss Story by PM’s pen
जो लोग इस कहानी का वीडियो देखेंगे उनके लिए सूचना:-हमारें अन्य प्लेटफॉर्म पर गाने और स्टोरीज पब्लिश होती रहती हैं लेकिन इस प्लेटफॉर्म पर यह पहली कहानी हैं। कहानी में आवाजें सॉफ्टवेयर की हैं जिनमें डायलॉग प्रॉपर नहीं होंगे। और इमेजेस सिर्फ नजरें बनाये रखने के लिए हैं जो शब्दों और भावों से कभी मैच भी नहीं करेगी। बावजूद इसके कहानियों का ढाँचा आपको पसंद आयेगा ऐसी उम्मीद करते हैं। खासकर कलाक्षेत्र से जुड़ें लोगों को इन कहानियों के ट्विस्ट एंड टर्न्स पसंद आ सकते हैं। मेल-फीमेल के डायलॉग्स और अन्य किरदारों को समझने में आसानी हो इसलिए हम अलग आवाजों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ऋचा अपने घर की गैलरी में आती थी और अपने बॉयफ्रेंड करन से इशारों में बातें करती थी। करन कभी सामनेवाली बिल्डिंग की गैलरी में होता तो कभी छत पर होता।
हमेशा की तरह उस दिन भी ऋचा गैलरी में खड़ी होकर अपने बॉयफ्रेंड करन से इशारों में बातें कर रही थी। करन के पीछे एक अधेड़ उम्र का इंसान रवि उस दिन छतपर खड़ा कुछ काम कर रहा था। ऋचा का ध्यान उस आदमी पर था लेकिन करन के ठीक पीछे होने की वजह से करन नहीं जानता था के कोई उसके पीछे खड़ा हैं।
इशारों-इशारों में करन ने अपनी तरफ से ऋचा को एक फ्लाइंग किस भेजा और ऋचा को भी उसका फ्लाइंग किस मांगा। उस अधेड़ इंसान का ध्यान उनकी तरफ नहीं था वह तो अपने काम में व्यस्त था। फिर भी उसकी उपस्थिति की वजह से ऋचा थोड़ी हिचकिचा रही थी।
आखिरकार करन के बहुत ज्यादा रिक्वेस्ट करने पर ऋचा ने अपना फ्लाइंग किस उसे भेजा, लेकिन ठीक उसी समय उस अधेड़ उम्र के इंसान का ध्यान ऋचा की तरफ गया। ऋचा के बॉयफ्रेंड करन ने तो वह फ्लाइंग किस झेलने की एक्टिंग की ही, लेकिन उस अधेड़ उम्र के आदमी ने भी मजाक में उस फ्लाईंग किस को हवा में उछलकर बाउंड्री लाइन की कैच की तरह झेला।
ऋचा ने जब अचानक हुई इस घटना को देखा तो वह भौचक्की होकर उसकी तरफ देखने लगी। उसके बॉयफ्रेंड को समझ नहीं आया के ऋचा ऐसा क्यों रियाक्ट कर रही हैं। करन ने उसे इशारों में पूछा भी के वह ऐसा रियाक्ट क्यों कर रही हैं? लेकिन ऋचा के चेहरे पर अब गुस्सा दिख रहा था।
हैरान-परेशान करन कुछ ना समझ आने से अपना माथा और सर खुजला रहा था, वही अधेड़ इंसान उसकी हालत देखकर मुस्कुरा रहा था।
करन की बौखलाहट और उस अधेड़ की मुस्कुराहट देखकर ऋचा खुद भी हैरान थी। वह पलट गयी और गैलेरी से अपने रुम में जाने को मुड़ी। लेकिन गैलेरी से रुम में जाते हुये जो कुछ उस वक्त घटा उसे याद करके ऋचा के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी।
भले ही उस अधेड़ की हरकत अजीब थी लेकिन उसकी हरकतों पर जब ऋचा का मुड़ बदल गया था तब करन के रिएक्शन भी देखने लायक थे।
दूसरे दिन ऋचाने उसी अधेड़ आदमी को अकेला बैठा देखा तो ऋचा उसके पास गयी और पिछले दिन की फ्लाईंग किस वाली बात पर उससे बहस करने लगी।
ऋचा उसके पास जाकर बोली, “क्यों अंकल? बुढ़ापे में जवानी चढ़ रही हैं क्या?”
“नहीं, बुढ़ापे में जवानी के दिन याद आ गये।”, उस अधेड़ ने बेबाकी से जवाब दिया।
“ऐसा हैं तो अपनी बीवी से प्यार करो, ऐसी बचकानी और छिछोरी हरकतें करके, कुँवारी लड़कियों के साथ फ्लर्टिंग क्यों कर रहे हो? आपकी बीवी को बताऊ क्या?”, अधेड़ की बेबाकी पर ऋचा ने उसे धमकाया।
“तुम उसे नहीं बता पाओगी।”, अधेड़ इस बार शांत स्वर में बोला।
“क्यों? मैं क्यों नहीं बता पाउंगी?” ऋचा ने फिर गुस्से से पूछा।
आकाश की तरफ उँगली करके अधेड़ फिर शांति से बोला, “वह वहाँ ऊपर आकाश में बैठी हैं।”
“इसलिए दूसरों को छेड़ते हो? इससे तो अच्छा था के दूसरी शादी कर लेते।”, ऋचा ने इस बार टाँट मारकर ग़ुस्से में कहा।
“नहीं कर सकता मैं दूसरी शादी। उसकी जगह कोई नहीं ले सकता। तुम अभी बच्ची हो, रिश्तों की गहराईयों को नहीं समझ पाओगी।” थोड़ा निराश होकर आकाश की तरफ देखते हुए अधेड़ बोला।
“एनी वे, मेरी हरकतों को भूल जाओ, वह जो मजाक था उस वक्त अचानक दिमाग में आया था। भूल जाओ उस बात को। बेस्ट ऑफ लक फॉर युअर लव लाईफ।”, अधेड़ ने ऋचा की लव लाईफ को अपनी शुभकामनाएं तहे दिल से दी।
“थैंक्स” ऋचा थैंक यू बोलकर जाने के लिए मुडी।
“रुको जरा”, उसे रोककर सीने से फ्लाइंग किस निकाल कर मुठ्ठी उसकी तरफ करते हुए अधेड़ बोला। “यह लो तुम्हारी फ्लाइंग किस, इसपर मेरा नहीं, तुम्हारे बॉयफ्रेंड का हक हैं।”
ऋचा उसकी बंध मुट्ठी की तरफ देखती हैं, पर मुट्ठी खोलकर फ्लाइंग किस नहीं लेती। बस उस अधेड़ इंसान की तरफ देखती रहती हैं।
“ले लो, क्या सोच रही हो?” अधेड़ ने ऋचा से पूछा।
“अभी के लिए रहने दीजिए, फिर कभी ले लूँगी” ऋचा मुस्कुराते हुऐ बोली।
“इसका मतलब, फिर मिलने वाली हो मुझसे?” अधेड़ ने हँसते हुये सवाल किया।
“आपने मुझे गुस्सा दिलाया था, पैनल्टी तो लगेगी आपको”, ऋचा इस बार शरारती अंदाज में बोली।
“कैसी पैनल्टी?” अधेड़ रवि ने आश्चर्य से पूछा।
“मेरा गुस्सा ठंडा करने के लिए, आइसक्रीम खिलानी पड़ेगी।”, ऋचा मजाक में बोली।
अधेड़ रवि ने अपनी जेब से एक नोट निकाली और उसे देते हुये कहा, “यह लो, अपने बॉयफ्रेंड के साथ जाकर खा लो।”
“उसके साथ खानी होती तो आपको क्यों बोलती?” ऋचा नाटकीय गुस्से में बोली।
अधेड़ रवि ने उसकी तरफ हँसकर देखा और पूछा, “कब खानी है आइस्क्रीम?”
“मेरी मर्जी। मैं रोज मांगू तो आपको रोज खिलानी पड़ेगी।”, ऋचा फिर मजाकिया अंदाज में बोली।
“ओके, डन! तुम्हें रोज आइस्क्रीम खिलाऊँगा।” अधेड़ बोला। रवि के हांमी भरने पर दोनों एक दूसरें की तरफ देखकर मुस्कुरायें।
“बाय द वे, मेरा नाम ऋचा हैं।” अपना हाथ शेकहैंड के लिए आगे बढ़ाते हुये ऋचा बोली।
“रवि” अपना नाम बताते हुये अधेड़ ने भी अपना हाथ मिलाया।
“तो मैं आपको अंकल बोलू या रवि?”, ऋचा ने उसका मजाक उड़ाते हुये पूछा।
“तुम दादाजी भी बोलो तो क्या फर्क पढ़ने वाला हैं? जबतक तुम्हारी फ्लाईंग किस मेरे पास डिपॉजिट रखी हैं, यह दिल जवान ही रहेगा।” इस बार अधेड़ रवि ने भी उसे मजाक में ही जवाब दिया।
“ऐसा हैं तो अपने सेफ्टी लॉकर में मेरा दिल सेफली संभालकर रखिये, कोई उसे चुरा ना ले।”, कहकर ऋचा वहाँ से निकल गयी।
एक दिन ऋचा और वहीं अधेड़ रवि एक रेस्टोरेंट में बैठे हुए अपने डिनर का लुफ्त उठा रहे थे। तभी अपना निवाला चबाते हुए ऋचा ने रवि से पूछा, “आपके कोई बच्चे नहीं है क्या?”
“एक लड़का हैं। विदेश में जॉब करता है।” रवि ने बताया।
“तो आप यहाँ अकेले रहते हो?”, ऋचा ने पूछा।
“हाँ, वाईफ नहीं रही। लड़का विदेश में हैं ऐसे में अपने घर में, मैं अकेला ही हूँ।”, रवि ने थोड़ा उदासी भरे स्वर में जवाब दिया।
“फिर तो आपको दूसरी शादी कर लेनी चाहिए थी ना। या किसी के साथ लिव इन, ओर समथींग लाइक डॅट।” उसकी आपबीती सुनकर ऋचा बोली।
“मैं अपनी वाईफ को भुला नहीं पाया हूँ।”, रवि ने थोड़ा सीरियस होकर कहा।
“कितने साल हुए वाईफ को जाकर?”, ऋचा ने रवि से पूछा।
“आठ साल।”, रवि ने शांत स्वर में जवाब दिया।
“और आपका लड़का कब से विदेश में हैं?” ऋचा ने तुरंत दूसरा सवाल पूछा।
“पाँच साल से।”, रवि ने फिर शांति से जवाब दिया।
“आठ साल पहले वाइफ की डेथ हुई हैं, पाँच साल पहले आपका लड़का विदेश गया है। फिर भी आपने दूसरी शादी नहीं कि? या किसी और से कोई रिश्ता नहीं रखा?” ऋचा ने अच्छर्य भरे स्वर में पूछा।
“नहीं।”, उसकी इतनी बड़ी बात का रवि ने बस इतना ही जवाब दिया।
“क्यों?”, ऋचा की उत्सुकता अब बढ़ गई थी। उसने फिर से रवि को प्रश्न पूछा।
“अब जो रिश्ते बनेंगे वें सिर्फ जरूरतों को पूरा करने के लिए बनेंगे। उनमें आकर्षण और चाहत ना के बराबर होगी।”, रवि ने ऋचा को समझाते हुए कहा।
“अरे यार! आज के जमाने में इतना कौन सोचता है?” ऋचा ने उसकी बातों पर रियाक्ट करते हुऐ कहा।
“मैं। मैं सोचता हूँ”, इस बार रवि ने हँसकर जवाब दिया।
“मैं कोई औरत देखू क्या आपसे शादी करने के लिए?”, ऋचा ने उसकी बात पर हँसते हुए पूछा।
रवि ने ना में गर्दन हिलाई और मना किया।
“प्रॉपर्टी के बंटवारे से डरते हो क्या? कोई महिला आपकी बीवी बनेगी तो उसको हिस्सा तो मिलेगा ही ना।”, ऋचा ने ताना मारते हुए पूछा।
“कल मेरे साथ रजिस्ट्रेशन ऑफिस चलो, सारी प्रॉपर्टी तुम्हारे नाम कर देता हूँ।”, रविने मुस्कुराते हुये कहा।
“मैं तो, सबकुछ लूँगी। घरबार, गाड़ी-बंगला, गहने-जोहरात, कपड़े-लत्ते, सब।”, ऋचा ने भी उसी अंदाज में मुस्कुराते हुए कहा।
“जो भी मेरे पास हैं, वह सब ले लो।”, रवि ने भी हँसकर कहा।
“ना बाबा ना! मुझे कुछ नहीं चाहिए। यह खानापीना और साथ में घूमना-फिरना ही मेरे लिए काफी है।” ऋचा ने खुले दिल से उसकी दौलत को ठुकराते हुये कहा।
उसकी बात पर रवि सिर्फ हँसा, पर कुछ बोला नहीं।
उसके बाद रवि और ऋचा कभी मुव्ही देखने जाते, कभी पिकनिक जाते तो कभी साथ में शॉपिंग करने जाते।
ऋचा का रवि के साथ इतना घुलना-मिलना और उसमें इन्वॉल्व होना करन को अच्छा नहीं लग रहा था। उसे लग रहा था के ऋचा उसके प्यार को छोड़कर रवि की तरफ ज्यादा ध्यान दे रही हैं।
एक दिन ऋचा और करण, अन्य गर्लफ्रैंड बॉयफ्रेंड की तरह गार्डन में घूम रहे थे तभी करन ने ऋचा से पूछा, “तुम उस रवि अंकल के साथ क्यों घूमती रहती हो?”
“वह दोस्त हैं मेरे।’, ऋचा ने बड़ी ही मासूमियत से अपने बॉयफ्रेंड करन को जवाब दिया।
“किस ऐंगल से? उसकी एज क्या है, तुम्हारी एज क्या है?” करन ने गुस्से में पूछा।
“क्यों? एक जवान लड़की और अधेड़ आदमी दोस्ती नहीं कर सकते क्या?”, ऋचा ने भी उसके सवाल पर अपना सवाल दाग दिया।
“लोग क्या कहेंगे?”, करन ने उसकी बातों पर झुँजलाते हुये पूछा।
“तुम्हें लोगों की फिक्र हैं या खुद तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा हैं?”, ऋचा ने इसबार बेबाक होकर पूछा।
“मुझे भी अच्छा नहीं लगता।”, करन ने नाराजगी जताते हुए कहा।
“तुम मुझपर शक कर रहे हो क्या?” ऋचा ने गुस्से से पुछा।
“नहीं, शक नहीं कर रहा हूँ। पर…” करन कुछ बोलने वाला था लेकिन रुक गया।
“वैसे, शक करते भी तो कोई फायदा नहीं होता”, ऋचा नाराज़ होकर करन से बोली।
“क्या मतलब?”, उसकी बात सुनकर करन ने पूछा।
“तुम मुझपर शक करोगे तो मैं तुमसे ब्रेकअप कर लूँगी।”, ऋचा ने साफ शब्दों में अपने विचार करन को बता दीये।
“उस अधेड़ उम्र के आदमी के लिए तुम मुझे छोड दोगी?” करन ने उसकी बात सुनकर गुस्से में चिल्लाकर पूछा।
“उनके लिए नहीं, तुम्हारे शकी मिजाज के लिए तुम्हें छोड़ दूंगी।”, ऋचाने भी चिल्लाकर जवाब दिया।
माहौल गर्मा रहा था। दो प्रेमियों के बीच अब तनाव चरम सीमा पर था।
विवाद बढ़ता गया और ऋचा करन से ब्रेकअप करके चली गयी। गार्डन के रास्ते पर उसे जाते देख करन वहीं पर स्तब्ध खड़ा रह गया।
उसी रात ऋचा रवि के घर आयी थी। रवि बीमार था इसलिए अपने बेड पर पीठ सटाकर बैठा हुआ था।
“आज आप मिलने नहीं आये तभी मैं समझ गयी थी के कुछ तो गड़बड़ हैं। और यहाँ आकर देखी तो आप बीमार पड़े हो” ऋचा रवि से कहने लगी।
“अरे! मैं ठीक हूँ। इतना कुछ नहीं हुआ हैं।”, रवि ने मुस्कुराते हुये उसे समझाया।
“वह तो दिख ही रहा हैं के कितने ठीक हो, लो यह दवा खा लो”। ऋचा ने दवा देते हुए रवि से कहा।
“मैं खुद ले लूँगा, तू घर जा। रात बहुत हो गयी हैं, घरवाले इंतजार कर रहे होंगे।”, रवि ने दवा लेते हुए कहा।
“इसीलिए कहती हूँ, दूसरी शादी कर लो, पर आप हो के मानते ही नहीं हो।”, ऋचा कोसते हुए बोली।
“सिर्फ दवा खिलाने के लिए दूसरी शादी क्यों करनी है?”, रवि ने हँसते हुये पूछा।
“सिर्फ दवा खिलाने के लिए नहीं रे बाबा। आपकी सेवा करने के लिए भी।” ऋचा ने भी हँसते हुये कहा।
“तुम जो हो।”, रवि ने उसकी तरफ देखते हुए मुस्कुराकर कहा।
“कब तक?”, ऋचा ने बस इतना ही पूछा पर उसके इतने से प्रश्न में गंभीरता भी थी और वास्तविकता भी।
“जब तक तुम्हारी अमानत मेरे पास हैं तब तक।” रवि ने उसकी गंभीरता को तोड़ने के लिए विनोद बुद्धि से जवाब दिया।
“आपके पास मेरी कौनसी अमानत हैं?”, ऋचा ने आश्चर्य से पूछा।
“तुम भूल गयी हो। तुम्हारी फ्लाईंग किस जो यहाँ रखी हैं।” दिल की तरफ हाथ करके रवि बोला।
“आप भी ना, पागल हो सच में।”, ऋचा ने मीठी सी स्माईल देते हुये कहा।
“तेरे बॉयफ्रेंड का क्या हाल हैं?”, रवि ने उसे मुस्कुराते देख पूछा।
“उसके साथ मेरा ब्रेकअप हो गया।”, ऋचा ने गर्दन नीचे झुकाकर जवाब दिया।
“क्यों?”, रवि ने हैरानी से पूछा।
“शक करता था मुझपर।”, ऋचा ने सीरियस होकर जवाब दिया।
“किसको लेकर शक करता था तुमपर?”, रवि ने फिर हैरान होकर पूछा।
ऋचाने उसका जवाब नहीं दिया बस खामोश रही।
“ऋचा में कुछ पूछ रहा हूँ तुमसे। किसको लेकर तुम्हारा बॉयफ्रेंड तुमपर शक करता हैं?”, रवि ने फिर अपने सवाल को दोहराया।
“आपको, आपको लेकर शक करता था वह मुझपर।”, ऋचा ने ब्रेकअप के पीछे की हकीकत रवि को बता दी।
“पागल हो क्या तुम? मेरे लिए अपने बॉयफ्रेंड से ब्रेकअप कर लिया?”, रवि नाराज होकर बोला।
“अरे यार! तुम मर्द लोग सभी एक जैसे क्यों हो? उसे लगता था मैं आपके लिए उसे इग्नोर करती थी। आपको लगता हैं मैंने आपके लिए उसे छोड़ा हैं। हम औरतों की भी अपनी कुछ मर्जी होती हैं कि नहीं?” ऋचा ने इसबार ऐसी बात कही जिसका रवि के पास कोई जवाब नहीं था।
रवि कुछ बोला नहीं खामोश ही रहा।
उस दिन के बाद ऋचा अपने बॉयफ्रेंड करन से कभी नहीं मिली। रवि से उसका मिलना-जुलना होता रहा। उनका रिश्ता अब ऋचा के ब्रेकअप के बाद और गहरा हो गया था। लेकिन ऋचा जवान थी और रवि विधुर था। ऊपर से रवि एक जवान बेटे का बाप भी था। इसलिए ऋचा और रवि का रिश्ता हमेशा एक अच्छे दोस्त और हमदर्द का ही बना रहा।
जवान लड़की कब तक बिनब्याही रहती। एक न एक दिन उसे शादी करके अपना घर बसाना होता हैं। ऋचा ने भी अपने घरवालों की मर्जी से अरेंज्ड मैरिज की। डेस्टिनेशन वेडिंग थी उसकी।
रवि उस शादी में नहीं जा पाया था। वह बाहर से भले खुश नजर आता था लेकिन अंदर ही अंदर टूटा हुआ था। बढ़ती उम्र और अकेलेपन से वह बीमार रहने लगा था। ऋचा जानती थी के रवि शादी अटेंड करने की स्थिति में होता तो जरूर उसकी खुशी में शरीक होता। इतना तो वह रवि को समझती थी।
शादी के बाद ऋचा एक दिन रवि से मिलने आयी। अपने पति को उसने रवि के बारें में सबकुछ बता दिया था। रवि शादी में नहीं आ पाया था इसलिए वह अपने पति को साथ लेकर आयी थी रवि से मिलने।
ऋचा तो ऋचा ही थी। रवि को दिखाने के लिए के दोनों पति-पत्नि शादी में कैसे दिख रहे थे, वह शादी के जोड़े में ही रवि से मिलने आयी थी।
“मैं आपसे नाराज हूँ, आप मेरी शादी में नहीं आये।”, रवि से मिलते ही ऋचा ने फायरिंग करते हुए नाराजगी जताई।
“अरे! क्या करें अब? तुम्हारी शादी के वक्त ही एडमिट होना पड़ा। ऊपर से तुमने शादी डेस्टिनेशन में की। एक बीमार हॉस्पिटलाईज आदमी कैसे पहुँचेगा इतनी दूर?”, रवि ने उसकी फायरिंग के आगे अपनी बीमारी की ढाल रख दी।
“और रही बात नाराजगी और तानों की। अब ऐसे ताने अपने पति को मारना। तुम्हें झेलनेवाला तुम्हारे हक का आदमी अब तुम्हें मिल गया हैं।’ रवि ने नव विवाहित जोड़े की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए कहा।
“किसे पता सच में बीमार थे कि मेरी शादी के गम में दुखी होकर बुखार चढ़ा था।”, ऋचा की इस बात पर तीनों कहकहे लगाकर हँस पड़े और उस उदास बेडरुम में थोडा सा खुशियों का माहौल छा गया।
“बीच-बीच में आती रहुँगी आपको सताने के लिए”, ऋचा ने कहा और फिर से माहौल में हँसी गूँजने लगी।
कुछ देर बाद दोनों नवविवाहित पति-पत्नि ने रवि का आशीर्वाद लिया। रवि ने भी पूरे मन से दोनों को आशीर्वाद देकर, भगवान से उन्हें सदा सुखी रखने की प्रार्थना की।
आशीर्वाद लेने के बाद अचानक से दूल्हा उठा और बोला, “आप लोगों को बहुत सारी पर्सनल बातें करनी होगी। आप बातें करें मैं बाहर हूँ। फिर शायद आपका जल्दी मिलना ना हो।”
उसकी बातों से रवि हैरान रह गया लेकिन दूल्हा सच में उन्हें बेडरुम में अकेला छोड़कर बेडरूम से बाहर चला गया।
“तुम्हे दूल्हा तो काफी समझदार मिला हैं।”, रवि ने दूल्हे की समझदारी की तारीफ करते हुए कहा। ऋचा रवि की बात पर कुछ बोली नहीं, बस हल्के से मुस्कुराई।
“अपना हाथ आगे करो।” रवि ने ऋचा को कहा।
“क्यों?”, ऋचा ने पूछा।
“करो तो।”, रवि ने दुबारा रिक्वेस्ट की।
“लो कर दिया। अब क्या?”, ऋचा आगे हाथ करते हुए बोली।
ऋचा को लगा के हर नये जोड़े को जैसे पहली बार घर आने पर गिफ्ट देने की प्रथा होती हैं, वैसे ही रवि कोई गिफ्ट देगा। लेकिन रवि ने जो किया, उसे देखकर ऋचा भावुक हो गयी। वह पल उसकी जिंदगी का ऐसा पल था, जिसे वह कभी भूल नहीं सकती थी।
ऋचा के हाथ आगे करती ही रवि अपने सीने से उसकी पहली फ्लाईंग किस निकालकर, अपने दोनों हाथ उसके आगे कर दिए। जैसे सीने में सालों से रखी ऋचा की अमानत उसे लौटा रहा हो। उस फ्लाइंग किस ने अबतक उसके दिल में उजाला बना रखा था। एक तरह से रवि उस फ्लाईंग किस के रुप में दिल के उजाले को, सुख-चैन और प्यार को, ऋचा के लिए गिफ्ट के रुप में लौटा रहा था।
इस फ्लाइंग किस को हमारी भौतिक आँखें देख तो नहीं सकती, लेकिन जिन्होने कभी किसी से सच्चा प्यार किया होगा उन्हें उस फ्लाइंग किस में धड़कता हुआ दिल और उस दिल की खूबसूरत रोशनी अवश्य दिखेगी।
उस दिल को, उस फ्लाइंग किस को वापस लौटाता हुआ रवि भावुक स्वर में बोला, “अब तुम्हारी शादी हो गयी हैं, तुम किसी की पत्नी बन गयी हो। इस फ्लाईंग किस पर अब सिर्फ तुम्हारे पति का हक हैं।”
ऋचा ने भावुक होकर तुरंत रवि के हाथों को अपने हाथों में लिया और उन्हें चूमते हुए मन ही मन रवि का आभार प्रकट किया।
“आपके रुप में मुझे एक सच्चा दोस्त मिला हैं, मैं आपको कभी नहीं भूल पाऊँगी।” बिदाई के उस अंतिम समय में ऋचा भावुक दिख रही थी।
“अपना ख़याल रखना, अब मैं नहीं हूँ यहाँ आपको दवा पिलाने के लिए।”, रवि के गालों को अंतिम बार सहलाती हुई ऋचा बोली।
“तुम भले ना रहो यहाँ, पर तूम्हारी यादें हमेशा रहेगी मेरे साथ में।”, रवि ने बोला लेकिन अंदर से वह भी जानता था के ऋचा अब किसी और कि हो चुकी हैं और उसके जैसी सच्ची दोस्त उसे और कोई नहीं मिलेगी।
अंतिम समय में जब ऋचा ने बाय करने के लिए अपना हाथ हिलाया तो रवि के मुँह से अपने आप आशीर्वाद रुप में शब्द निकल पड़े, “भगवान तुम दोनों की जोड़ी सदा सलामत रखें।”
रवि से आशीर्वाद लेकर ऋचा और उसका पति जब रास्ते पर जाने लगे, तब रवि बस पीछे से उस दूल्हा-दुल्हन के जोड़े को देखता रहा।
उम्मीद हैं, आप सबको कहानी पसंद आयी होगी। कुछ खामियाँ रह गयी होगी तो उन्हें अगली कहानियों में पूरा कर लेंगे।
समाप्त
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